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राष्‍ट्रीय ई-निर्धारण केन्‍द्र: कर निर्धारण प्रक्रिया में और ज्‍यादा दक्षता, पारदर्शिता तथा जवाबदेही

राजस्‍व सचिव अजय भूषण पांडेय ने नई दिल्‍ली में राष्‍ट्रीय ई-निर्धारण योजना (एनईएसी) का शुभारंभ किया। राष्‍ट्रीय ई-निर्धारण केंद्र (एनईएसी) के शुभारंभ के साथ ही आयकर विभाग कर निर्धारण प्रक्रिया में और ज्‍यादा दक्षता, पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु ‘फेसलेस ई-निर्धारण’ की शुरुआत कर अपने कामकाज में उल्‍लेखनीय बदलाव लाएगा। उन्‍होंने कहा कि एनईएसी के शुभारंभ से करदाताओं और कर अधिकारियों का एक-दूसरे से आमना-सामना नहीं होगा।

आयकर विभाग के एनईएसी की स्‍थापना प्रधानमंत्री के ‘डिजिटल इंडिया’  विजन और ‘कारोबार में और ज्‍यादा सुगमता’ सुनिश्चित करने के मद्देनजर करदाताओं को बेहतर सेवाएं मुहैया कराने और करदाताओं की शिकायतों में कमी लाने के बड़े लक्ष्‍यों की दिशा में एक महत्‍वपूर्ण कदम है।

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प्रथम चरण में आयकर विभाग ने ‘फेसलेस ई-निर्धारण योजना 2019’ के तहत जांच के लिए 58,322 मामलों की पहचान की है और निर्धारण वर्ष 2018-19 के मामलों के लिए 30 सितम्‍बर, 2019 से पहले ई-नोटिस भेज दिए गए हैं।

करदाताओं को अपने-अपने पंजीकृत ई-फाइलिंग खातों/ईमेल आईडी को चेक करने की सलाह दी गई है और इसके साथ ही उनसे 15 दिनों के अंदर जवाब देने का अनुरोध किया गया है। विभाग को उम्‍मीद है कि करदाताओं के लिए अनुपालन आसान हो जाने से संबंधित मामलों का निपटारा अत्‍यंत तेजी से किया जा सकेगा।

फेसलेस निर्धारण के लाभ

  • एनईएसी से निर्धारण अधिकारी और करदाता का आमना-सामना होने की जरूरत समाप्‍त हो जाएगी।
  • नई प्रणाली से संसाधनों का व्‍यापक इस्‍तेमाल संभव हो पाएगा।
  • एनईएसी ने गतिशील क्षेत्राधिकार के साथ टीम आधारित निर्धारण की शुरुआत की है।
  • करदाताओं के लिए अनुपालन आसान हो गया है।
  • पारदर्शिता एवं दक्षता सुनिश्चित हुई है, जिससे निर्धारण एवं निगरानी की गुणवत्‍ता बेहतर हुई है।
  • फेसलेस निर्धारण की जिम्‍मेदारी केवल एक ही एजेंसी को देने से कार्यरत विशेषज्ञता सुनिश्चित होगी।
  • मामलों का निपटारा तेजी से हो सकेगा।
  • मानकीकरण एवं गुणवत्‍ता प्रबंधन।
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