फैक्ट चेक: क्या पीएम मोदी ने बांग्‍लादेश के लोगों की आजादी के लिए सत्‍याग्रह किया था?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बांग्लादेश दौरे पर कुछ ऐसा कहा, जिसके बाद उनके आलोचक उस तथ्य को झूठ मानकर उन्हें ट्रोल करने लगे। लेकिन शायद उन्हें उस सत्याग्रह के बारे में जानकारी ही नहीं थी, जिसका पीएम मोदी जिक्र कर रहे थे। पत्रकार रविश कुमार से लेकर कांग्रेस नेता शशि थरूर तक सभी सवाल उठाने लगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ढाका में आयोजित एक समारोह में ऐसा दावा क‍िया कि भारतीय ट्विटर पर संग्राम सा छिड़ गया। मोदी ने कहा कि बांग्‍लादेश की आजादी के लिए उन्‍होंने अपने साथियों के साथ मिलकर आंदोलन किया था और जेल भी गए थे। पीएम के अनुसार, तब उनकी उम्र 20-22 साल रही रही होगी।

आईए जानते हैं क्या है पूरा मामला?

जब शेख मुजीब ने 26 मार्च 1971 के दिन स्वतंत्र बंगलादेश की घोषणा कर दी और The Provisional Government of the People’s Republic of Bangladesh की स्थापना हो गयी। शुरू में यह सरकार 10 फुट लम्बे और 10 फुट चौड़े कमरे में ढाका में ही थी। बाद में जब पाकिस्तानी फौज का आतंक बढ़ा तो इसे कलकत्ता शिफ्ट कर दिया गया। इस सरकार की स्थापना 10 अप्रैल को हुई थी। उसके प्रधानमंत्री थे ताजुद्दीन अहमद छः दिसंबर को भूटान ने बंगलादेश को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी ,उसके बाद बर्मा ( म्यांमार ) की मान्यता मिली। भारत ने इन दोनों देशों के बाद मान्यता दी. संयुक्त राष्ट्र की मान्यता अप्रैल 1972 में मिली।

जब बंगलादेश की सरकार की स्थापना कलकत्ता में हुई तो भारत के अधिकतर विश्वविद्यालयों में परीक्षा चल रही थी। उसके बाद गर्मियों की छुट्टियां शुरू हो गयीं। जब जुलाई में कालेज खुले तो कई विश्वविद्यालयों में छात्रों ने जुलूस निकाले और बंगलादेश की सरकार को मान्यता देने के लिए मांग शुरू हो गयी।

जनसंघ और सोशलिस्ट पार्टी वालों ने जुलूस आदि निकाला। इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं, क्योंकि कांग्रेस की सरकार थी। इंदिरा गांधी ने तो वास्तव में बंगलादेश मुक्ति संग्राम की सबसे बड़ी समर्थक थीं लेकिन मान्यता देने के लिए वे सही समय का इंतजार कर रही थीं। बंगलादेश को दिलवाने के लिए नरेंद्र मोदी की पुरानी पार्टी जनसंघ के नेता ,अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी पार्टी का आवाहन किया था। जहां भी उनका आधार मज़बूत था वहां धरने प्रदर्शन हुए। बहुत सारे जिलों में सत्याग्रह हुए , दिल्ली में संसद भवन के सामने स्वतन्त्रता दिवस के ठीक पहले 1971 में एक सभा भी हुयी।

जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जनसंघ और इनसे जुड़े सारे संगठन सत्याग्रह कर रहे थे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल थे।