चुस्त व तंदरूस्त रहने के लिए अपनाएं पुरानी आदतों को

समय के साथ-साथ लोगों के जीवन, उनके रहन सहन यहां तक कि खानपान की आदतों व तरीकों में भी बदलाव आया है और शायद यही कारण है कि आज लोग अधिक बीमार पड़ते हैं। वहीं, अगर पुराने समय में नजर डालें तो उस समय न तो विज्ञान ने उतनी तरक्की की थी लेकिन फिर भी लोग बेहद कम बीमार पड़ते थे और उसकी वजह थी उनका लाइफस्टाइल। इसलिए अगर आप भी खुद को स्वस्थ बनाना चाहते हैं तो खुद में कुछ प्राचीन आदतों को शामिल कीजिए-

  1. पुराने समय में लोग खाने के लिए फर्श पर बैठते थे। इस तरह जब आप फर्श पर क्रॉस लेग करके बैठते हैं। ऐसे बैठना सुखासन योग की तरह होता है। इस तरह से बैठना ऐसे आसान के समान है जो पेट की मांसपेशियों को खोलता है और व्यायाम करता है। इससे ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है और शरीर में लचीलापन आता है। इस तरह से खाना खाना पाचन के लिए भी बेहतर है और सूजन और अम्लता की समस्याओं को कम कर सकता है।
  2. आजकल घरों में मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग नहीं किया जाता। लेकिन आपको शायद पता न हो कि मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से कैंसर जैसी बीमारियों को दूर किया जा सकता है क्योंकि मिट्टी के बर्तनों की क्षारीय प्रकृति भोजन की अम्लीय प्रकृति को संतुलित करती है और कैंसर की कोशिकाएं एक क्षारीय वातावरण में विकसित नहीं होती हैं। मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से खाने में कई अन्य खनिज भी शामिल हो जाते हैं जो शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं।
  3. प्राचीन काल में शाम होते ही लोग खाना खा लिया करते थे। देर से खाना खाना उनकी परंपरा में सही नहीं माना जाता था। लेकिन मौजूदा समय में लोग देर रात ही खाना खाते हैं जिससे खाए गए भोजन को पचने का अधिक समय नहीं मिलता और एसिडिटी, नींद न आना या गैस और अन्य समस्याएं भी होने लगती हैं। यही नहीं वेट बढ़ने का भी मुख्य कारण भी यही होता है।