अपनाये ये आसान उपाय बच्चो को कैंसर होने से बचने के लिए

कैंसर एक ऐसी घातक बीमारी हैं जो कभी भी किसी को भी हो सकती हैं। आजकल यह बीमारी बच्चो में बहुत ज्यादा देखि जा रही हैं। दरअसल आजकल के बच्चे कुछ भी खा लेते है जो उनके शरीर को बहुत ज्यादा नुकसान पहुचने के साथ साथ स्वास्थ्य को भी ख़राब कर देता हैं।

कैंसर के मामले पहले वयस्कों में ही सुनने को मिलते थे। लेकिन बड़ी संख्या में अब बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। कैंसर शरीर के किसी भाग में सामान्य कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि के कारण होता है। सामान्य परिस्थितियों में शरीर की कोशिकाओं का एक नियंत्रित तंत्र होता है। जब कभी इस तंत्र में गड़बड़ी आती है, तब कार्सिनोजन हमला करने लगते हैं।

कई तरह का होता है चाइल्डहुड कैंसर

ल्यूकेमिया : अस्थि मज्जा और ब्लड के कैंसर को ल्यूकेमिया कहते हैं। बच्चों में पाए जाने वाले कैंसर में यह सबसे आम है। चाइल्डहुड कैंसर से पीडि़त बच्चों में 30 फीसदी बच्चे ल्यूकेमिया से ग्रस्त होते हैं। हड्डियों के जोड़ों में दर्द, थकान, कमजोरी और त्वचा का पीला पड़ जाना आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं। कीमोथेरेपी इसका एकमात्र इलाज है।

ब्रेन एंड सेंट्रल नर्वस सिस्टम ट्यूमर : यह बच्चों में दूसरा सबसे ज्यादा पाया जाने वाला कैंसर है। कैंसर से पीडि़त बच्चों में 26 ‘ इसी के मरीज होते हैं। ब्रेन ट्यूमर कई प्रकार के होते हैं। उन सभी के उपचार और स्वरूप अलग-अलग हैं। इसमें सिरदर्द, उल्टी, धुंधला या एक ही चीज दो दिखाई देना, चक्कर आना, चलते समय सहारे की जरूरत पडऩा जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं।

न्यूरोब्लास्टोमा : कैंसर का यह प्रकार शिशुओं और छोटे बच्चों को होता है। यह 10 वर्ष से ज्यादा आयु के बच्चों में शायद ही देखने को मिलता है। पेट में सूजन, हड्डी में दर्द और बुखार इसके लक्षण हैं। 6′ मामले इसी कैंसर के होते हैं।

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