अपनाएं यह घरेलू नुस्खा अगर आप है एसिडिटी से परेशान !

एसिडिटी एक प्रकार की बीमारी ही है जो सही खाना नहीं मिलने या खराब खाना मिलने के कारण कलेजे और पेट में होनी लगती है इसे आम भाषा में तो एसीडीटी बोला जाता है लेकिन इसे कलेजे में जलन होना भी कहा जाता है। एसीडीटी अक्सर ज्यादा तीखा खाना खाने से ही होती है । जब हम खाना खाते है तब तो कुछ अनुभव नहीं होता परन्तु बाद में कलेजे और  काफी दर्दनाक जलन होने लगती है जिससे हमें कुछ भी अचानहिं लगता है। इसके लिए कुछ घरेलू नुस्खे है जिसकी  इससे छुटकारा पा सकते है।

इसके लिए आयुर्वेदिक उपचार

आँवले का रस, मिश्री और भुने जीरे का चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम पीने से अम्लपित्त की विकृति नष्ट होती है।

सन्तरे के रस में थोड़ा-सा भुना हुआ जीरा और सेंधा नमक मिलाकर सेवन करने से अम्लपित्त में बहुत लाभ होता है।

चने के लड्डुओं में काली मिर्च छिड़क कर खाने से पित्त की बीमारी ठीक होती है।

चने के सत्तू को पानी में घोलकर पीने से कुछ दिन में अम्लपित्त में आराम होता है।

गाजर के रस में शहद मिलाकर पीने से अम्लपित्त में पूर्ण लाभ होता है।

नारियल का पानी पीने से एसिडिटी मिट जाती है।

पित्त के प्रकोप में जामुन का रस और गुड़ बराबर मात्रा में मिलाकर आग पर रखें और भाप को साँस के रूप में खींचे, लाभ होगा।

मूंग की दाल के साथ पकाये हुए परवल को ठण्डा कर उपयोग में लाने से पेट की जलन मिटती है।

भुनी हुई ज्वार, जिसे खील कहते हैं, बताशों के साथ खाने से पेट की जलन ठीक हो जाती है।

शीत पित्त के विकृत होने पर काली मिर्च के चूर्ण को घी में मिलाकर शरीर पर लेप करने से शीघ्र लाभ होता है।

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