लिवर में सूजन के उपचार के लिए अपनाये ये तरीका

शोधकर्ताओं ने खून और लिवर में मौजूद ट्राइग्लिसराइड्स (वसा का प्रकार) की खोज की है जो लिवर में स्वतंत्र रूप से इंसुलिन का प्रभाव पैदा करता है। इस खोज से टाइप 2 डायबिटीज (मधुमेह) के सबसे बड़े रहस्यों में से एक से पर्दा उठ गया है और लिवर में सूजन के उपचार का नया तरीका मिला है।

टाइप 2 मधुमेह में लिवर द्वारा पैदा ब्लड शुगर को कम करने में इंसुलिन कामयाब नहीं होता है, जबकि आश्चर्यजनक रूप से लिवर संबंधी ट्राइग्लिसराइड्स को पैदा होने देता है। इसके कारण हाई ब्लड शुगर और लिवर में सूजन सहित कई बीमारियां पैदा होती हैं। ट्राइग्लिसराइड्स पैदा होने पर लिवर में इंसुलिन के बदले प्रभाव का अध्ययन कर येल विश्वविद्यालय के शोधकर्ता इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं।

फैटी एसिड से ट्राइग्लिसराइड उत्पादन की मात्रा का पता लगाने के लिए शोधकर्ताओं ने तीन तरह के चूहों पर परीक्षण किया। सामान्य चूहे, इंसुलिन प्रतिरोधी ऐसे चूहे जिन्हें उच्च वसा युक्त भोजन दिया गया था और अनुवांशिक तौर पर इंसुलिन ग्राही चूहे। तीनों परीक्षणों में पाया गया कि कि ट्राइग्लिसराइड उत्पादन मुख्य रूप से फैटी एसिड के वितरण पर निर्भर करता है न कि लिवर में इंसुलिन के प्रभाव पर।

शोधकर्ताओं की टीम की अगुआई करने वाले प्रोफेसर ने बताया कि यह अध्ययन लिवर की बीमारियों को लेकर नई अंतर्दृष्टि देता है। इससे पूरी दुनिया में सबसे सामान्य लिवर रोग फैटी लीवर के उपचार के लिए नया तरीका मिला है।