मजबूरी में मनरेगा में पत्थर तोड़ रहा यह पूर्व क्रिकेट कप्तान, कोरोना ने छीना रोजगार

कोरोना काल में कई लोगों का रोजगार छिन गया है। इस महामारी का असर खेल जगत पर भी हुआ है। नेशनल और स्टेट लेवल के खिलाड़ी भी बेरोजगारी की मार झेल रहे है और उन्हें मजदूरी करने और सब्जी बेचने के लिए तक मजबूर होना पड़ा है। ऐसा ही एक नाम क्रिकेट के खेल से जुड़ा है जो है उत्तराखंड व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान राजेंद्र सिंह धामी। वह कोरोना काल में आर्थिक तंगी की वजह से मनरेगा में मजदूरी का काम करने के लिए विवश हैं।

राजेंद्र सिंह धामी उत्तराखंड में पत्थर तोड़कर घर चलाने को मजबूर हैं। ऐसे में उन्होंने सरकार से एक अपील की है। दूसरी तरफ डीएम डॉ. विजय कुमार जोगदांडे ने राजेंद्र सिंह धामी की आर्थिक स्तिथि को काफी खराब बताते हुए कहा है कि उन्होंने डिस्ट्रिक स्पोर्ट्स ऑफिसर से बात कर धामी को तुरंत पैसों की मदद पहुंचाने का आग्रह किया है। उन्हें मुख्मंत्री स्वरोजगार योजना या अन्य योजनाओं के तहत लाभ देने की मांग की है ताकि वह भविष्य में परेशान ना हो।

बता दे महज तीन साल की उम्र में राजेंद्र सिंह धामी पैरालिसिस के शिकार हो गए थे। ऐसे में उनका 90 प्रतिशत शरीर दिव्‍यांग हो गया था। क्रिकेट के जूनून के चलते धामी ने मैदान पर काफी बेहतर प्रदर्शन किया है। हिस्ट्री में मास्‍टर्स डिग्री और बीएड कर चुके धामी मजदूरी करने से पहले रुद्रपुर में व्‍हीलचेयर वाले बच्‍चों को क्रिकेट की कोचिंग दे रहे थे, लेकिन कोरोना की वजह से यह सब रुक गया। और वह बेरोजगार हो गए।

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