सेहत के लिए हानिकारक है बार-बार उबासी आना, जानिये कैसे

सामान्यतः हम मानते हैं कि उबासी या जम्हाई लेना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। यह हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है, हम दिन में कम से कम एक बार उबासी या जम्हाई जरूर लेते हैं। लोग यह मानते हैं की उबासी शरीर में थकान महसूस होने के कारण आती है, थोड़ी देर सोकर इसे पूर्ण्तः दूर किया जा सकता है। आपको यह जानकर बहुत आश्चर्य होगा कि कभी-कभार उबासी लेना बहुत ही सामान्य है लेकिन ज्यादा उबासी लेना खतरे की घंटी है।

उबासी बहुत ही सामान्य बात है लेकिन अत्यधिक उबासी कुछ चिकित्सीय स्थितियों की ओर इशारा करती है। कुछ सामान्य चिकित्सीय स्थितियां हैं जो कि ज्यादा उबासी का कारण बनती है:

लिवर डिसीज

लिवर संबंधित बीमारी का आखिरी स्टेज अत्यधिक उबासी के रूप में हो सकता है। इस समय महूसस होने वाली थकावट इसके लिए पूर्ण्तः जिम्मेदार है।

मल्टीपल स्केलेरोसिस

एक स्टडी के मुताबिक जो लोग इस स्थिति से पीड़ित हैं, उन्हें अत्यधिक उबासी आती है। इससे पीड़ित लोगों में थर्मोरगुलेटरी डिसफंक्शन होता है जहां वे अपने शरीर के तापमान को पूर्ण्तः नियंत्रित करने में असमर्थ होते हैं। उबासी के कारण शरीर का तापमान ठंडा हो जाता है।

वासोवगल रिएक्शन

यह तब होता है जब नर्वस सिस्टम का हिस्सा जो कि ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट के लिए पूर्ण्तः जिम्मेदार है, गड़बड़ाता है। यह तब होता है जब आप अत्यधिक तनावपूर्ण स्थिति में होते हैं। ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट में गिरावट ब्लड को मस्तिष्क तक पहुंचने से रोकती है। ऐसी स्थिति में, शरीर स्वचालित रूप से उबासी लेकर ऑक्सीजन लेने की कोशिश करता है।

स्लीपिंग डिसऑर्डर

अनिद्रा या स्लीप एपेना सबसे आम स्लीप डिसऑर्डर्स हैं जो कि बहुत अधिक थकावट लाते हैं और इससे उबासी की परेशानी बढ़ जाती है।

ब्रेन डिसफंक्शन

स्टीडी के मुताबिक ब्रेन ट्यूमर के कारण अत्यधिक उबासी आती है और ब्रेन स्टेम में घावों से जोड़ा जा सकता है। पिट्यूटरी ग्लैंड के संपीडन का परिणाम भी उबासी के रूप में हो सकता है।