समलैंगिक विवाह भारतीय परिवार को पूरा नहीं कर सकता, मोदी सरकार ने किया विरोध

समलैंगिक विवाह को मंजूरी देने की मांग को लेकर दायर याचिकाओं पर केंद्र की मोदी सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपना रुख जाहिर किया हैं। सरकार ने गुरुवार को कहा कि एक ही लिंग के जोड़े का साथ पार्टनर की तरह रहना और यौन संबंध बनाने की तुलना भारतीय परिवार से नहीं की जा सकती।

केंद्र सरकार का यह रुख हिंदू विवाह कानून और विशेष विवाह कानून के तहत समलैंगिक विवाह को मंजूरी देने की मांग को लेकर दायर याचिका के जवाब में सामने आया हैं। गौरतलब हैं समलैंगिक विवाह को मंजूरी देने की मांग को लेकर उच्च न्यायालय में कई याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं, जिन पर सुनवाई जारी हैं। इन याचिकाओं को लगाने वालों में दो महिलायें भी हैं जो कई सालों से साथ रह रही हैं और उन्होंने समलैंगिक विवाह को मंजूरी देने की मांग की हैं।

मोदी सरकार ने कोर्ट में कहा कि शादी का दो व्यक्तियों की निजी िन्दगी पर असर होता हैं। लेकिन इसे निजता की अवधारणा में नहीं छोड़ा जा सकता है। सरकार ने कहा पार्टनर की तरह साथ रहना और समान लिंग के साथ यौन संबंध रखना, भारतीय परिवार के मानकों और ईकाई से संबंध नहीं रखता। जिसमे एक पति, पत्नी और बच्चे होते हैं। इसमें एक जैविक पुरुष ‘पति’ होता है, जैविक महिला ‘पत्नी’ और इनके मिलन से बच्चे पैदा होते हैं।

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