ऐसे पाएं तनाव और डिप्रेशन से छुटकारा

आपने ऐसे कई लोगों को देखा होगा कि जो यह कहते हैं कि मैं डिप्रेशन में आ गया हूं या मुझे डिप्रेशन हो गया है। प्रतिदिन महसूस होने वाले चिड़चिड़ेपन और झल्लाहट को लेकर आपको भी शायद ऐसा लगता होगा, लेकिन ऐसा जरुरी नहीं है कि आपको डिप्रेशन की दिक्कत है। इस स्थिति में आपको गंभीर तनाव भी तो हो सकता है। अधिकतर लोग इस स्थिति को एक ही मानते हैं, लेकिन आपको बता दें कि यह स्थिति बहुत अलग-अलग होती है और इनका हमारी जिंदगी और मन पर अलग-अलग तरीकों से बहुत गहरा असर पड़ता है। आज हम आपको यहाँ बता रहे हैं कि इसमें क्या फर्क होता है और कैसे इसकी पहचान की जा सकती है।

आपको बता दे की इन दोनों परेशानियों की समस्याएं एक जैसी ही होती है, इसलिए इनके बीच अंतर समझ पाना थोड़ा मुश्किल होता है। लाइफस्टाइल से जुड़े बदलाव करने या उनका सामना करने से तनाव के लक्षणों से राहत पायी जा सकती है। लेकिन डिप्रेशन से राहत पाने के लिए आपको डॉक्टरी मदद की आवश्यकता पड़ सकती है। तनाव एक घटना या एक स्थिति से शुरू होता है, जबकि डिप्रेशन एक मानसिक विकार है जो दिमाग के काम करने के तरीके को प्रभावित करता है। डिप्रेशन किसी आनुवंशिक गड़बड़ी के कारण भी हो सकता है।

तनाव और डिप्रेशन के पहचानने की बात करें तो तनाव होने पर हो सकता है कि आपको काफी देर रात तक नींद न आए या फिर साधारण से काफी अधिक समय तक सोते रहें। लेकिन डिप्रेशन होने पर आपकी नींद में इस तरह के बदलाव होंगे कि आपको अनिद्रा या एक्सेसिव स्लीप डिसॉर्डर जैसी तकलीफ हो सकती है। वहीं तनाव होने पर व्यक्ति किसी कार्य को सम्पन्न करने में बहुत अधिक मेहनत करते हुए अपनी असमर्थता का सामना करने की कोशिश करता है।

जबकि डिप्रेशन में मरीज, हर वक़्त और हर जगह निराशावादी और उदास महसूस करता है। तनावग्रस्त होने पर व्यक्ति का बेचैन, परेशान, चिड़चिड़ा या उदास महसूस करना आम बात है। लेकिन जब व्यक्ति डिप्रेशन या अवसाद से ग्रस्त हो तो बिना किसी विशेष कारण के व्यक्ति बार-बार बहुत अधिक गुस्सा और झुंझला जाता है।

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