यूपीपीसीएस प्रारंभिक परीक्षा में पूर्व सैनिकों को आरक्षण का लाभ दें : उच्च न्यायालय

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीसीएस) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2021 का परिणाम आंशिक रूप से रद्द कर इसमें पूर्व सैनिकों को पांच प्रतिशत आरक्षण देने का आदेश दिया है।

न्यायालय ने पीसीएस परीक्षा 2021 में पूर्व-सैनिकों को पांच फीसदी आरक्षण का लाभ देने से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई के बाद परीक्षा परिणाम उस सीमा तक रद्द करने को कहा जिससे पूर्व सैनिकों को पांच प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा ने याचिका में उल्लिखित इस तथ्य को सही ठहराया है कि 2021 की प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम दोषपूर्ण है क्योंकि इसमें पूर्व सैनिकाें को आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया है। न्यायमूर्ति चंद्रा ने इस आधार पर परीक्षा परिणाम को पूर्व सैनिकों का आरक्षण सुनिश्चित करने की सीमा तक रद्द करने का आदेश पारित किया है।

इसके साथ ही अदालत ने आयोग को यह निर्देश भी दिया है कि संशोधित परीक्षा परिणाम घोषित करने के बाद एक महीने में सफल घोषित उम्मीदवारों के लिए मुख्य परीक्षा का आयोजन किया जाए। गौरतलब है कि पीसीएस परीक्षा की पूर्व निर्धारित नीति के तहत ग्रुप बी और ग्रुप सी के पदों पर पूर्व सैनिकों को आरक्षण का लाभ दिया जाता है। इसके बाद मुख्य परीक्षा में ग्रुप बी के पांच प्रतिशत पद पूर्व सैनिकों के लिये आरक्षित रहते हैं।

उप्र पीसीएस परीक्षा 2021 की प्रक्रिया फरवरी 2021 में शुरु होने के बाद 17 मार्च तक आवेदन प्रक्रिया पूरी हुई थी। इस सत्र की प्रारंभिक परीक्षा 24 अक्टूबर 2021 को आयोजित होने के बाद परिणाम दिसंबर 2021 में घोषित किया गया था। वहीं मुख्य परीक्षा का परिणाम इस साल 12 जुलाई घोषित किया गया। मुख्य परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों के साक्षात्कार का दौर 21 जुलाई से शुरु हुआ है।

इस बीच प्रारंभिक परीक्षा परिणाम में पूर्व-सैनिकों को आरक्षण नहीं देने का मामला उच्च न्यायालय में उठाते हुए पेश की गयी याचिका पर अदालत ने मंगलवार को आदेश जारी कर आयोग को प्रारंभिक परीक्षा का संशोधित परिणाम घोषित करने को कहा है।

 

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