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भारत जलवायु परिवर्तन के मालमे में पांचवे सबसे कमज़ोर देशों में

ग्लोबल क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स 2020 ने भारत को जलवायु परिवर्तन के मामले में पांचवें सबसे कमजोर देश के रूप में सूचीबद्ध किया है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि जलवायु परिवर्तन से होने वाली मौतों की सबसे अधिक संख्या भारत से दर्ज की गई है।

इस रिपोर्ट के अनुसार, 2018 में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से भारत दूसरे सबसे बड़े मौद्रिक घाटे का भी शिकार था।

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जर्मनवाच नामक थिंक टैंक द्वारा रिपोर्ट बनाई और जारी की गई, जिसने जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों को निर्धारित करने के लिए 181 देशों का विश्लेषण किया। आर्थिक नुकसान के विभिन्न मापदंडों, जीडीपी को होने वाले नुकसान और जान गंवाने के आकलन के आधार पर, रिपोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि जापान जलवायु परिवर्तन की चपेट में सबसे पहले आता है, इसके बाद फिलीपींस, जर्मनी, मेडागास्कर और अंत में पांचवे स्थान पर भारत हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, 300 से अधिक लोगों की जान लेने वाली केरल में आई बाढ़ के साथ-साथ 2018 के दक्षिण-पश्चिम मानसून से भी भारत बुरी तरह प्रभावित हुआ था।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट ने बताया कि “2018 में आई चक्रवात तितली और गाजा भारत के पूर्वी तट से टकराई थी। 150 किलोमीटर प्रति घंटे की हवा की गति के साथ, चक्रवात तितली ने कम से कम आठ लोगों की जान ले ली जबकि 450000 लोगों को बिजली के बिना गुज़ारा करना परा।

वर्ष 2018 में, जापान सबसे ज़्यादा मौसम की खराबी से हुई घटनाओं की चपेट में आया। जिसके परिणामस्वरूप, जापान सूची में शीर्ष पर रहा।

रिपोर्ट विश्लेषण के अनुसार, जुलाई के महीने में मूसलाधार बारिश ने 200 से अधिक लोगों की जान ले ली और 5,000 घरों को नुकसान पहुंचाया। और जैसे ये सब काफी नहीं था, टाइफून जेबी ने सितंबर 2018 में भारी मात्रा में विनाश किया।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि 2018 में जर्मनी ने औसत तापमान से 2.9 डिग्री सेल्सियस अधिक तापमान के साथ अपने दूसरे सबसे गर्म वर्ष का अनुभव किया। जिसके कारण 1,234 लोग मारे गए।

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