भारत-नेपाल तनाव के बीच गोरखा सैनिकों की हो रही वापसी, जानें क्या है भारतीय सेना में इनका स्थान

भारत-नेपाल के बीच लिपुलेख मामले को लेकर तनाव चल रहा है। इसी बीच लॉकडाउन में फंसे रहे गोरखा सैनिकों की लगातार वापसी भी हो रही है। पिछले दो दिनों में करीब 100 सैनिक थर्मल स्‍क्रीनिंग के बाद सोनौली सीमा से भारत में प्रवेश पा चुके है। ये सभी कोरोना की वजह से लगे लॉकडाउन के शुरू होने से पहले छुट्टी पर गए हुए थे। इसी बीच लॉकडाउन होने से सीमा सील कर दी गई और ये सभी सैनिक जहां थे, वही फंसे रह गए।

लॉकडाउन में ढील मिलने और भारतीय दूतावास की पहल पर अब सैनिकों की वापसी की शुरुआत हुई है। कुछ सैनिक परिवार के साथ लौट रहे हैं। आपको बता दे गोरखा रेजिमेंट की शुरुआत 1815 में हुई थी। भारतीय सेना में गोरखा सैनिकों का बड़ा सम्‍मान है और ये अपनी बहादुरी के लिए जाने जाते है। इनका ध्‍येय वाक्‍य है,-‘ Better to Die than Live Like a Coward’। यानि ‘कायरता की ज़िन्दगी जीने से बेहतर है मरना’।

गोरखा सैनिकों की बहादुरी से प्रभावित अंग्रेजों ने सन 1815 में रेजिमेंट बनाई। जिसे ब्रिटिश इंडियन आर्मी का हिस्सा बनाया गया। बाद में जब देश आजाद हुआ तो इसे ‘गोरखा रेजिमेंट’ में तब्‍दील कर दिया गया। देश में कई अवसरों पर बहादुरी के लिए गोरखा रेजिमेंट को कई पदक और सम्मान मिल चुके है।

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