मुँह की सैकड़ों बीमारियों में से ही एक है मसूड़ों की बीमारी

आज के युग में नए-नए उपकरण व तकनीकें तो ऐजात हो ही रही हैं साथ ही साथ नयी नयी बीमारियां भी सामने आ रही हैं.
हमारा मुँह हमारे पूरे शरीर का मुख्य द्वार है. यदि इस द्वार के रक्षक ही स्वस्थ न हो तो शरीर के बाकी अंग कैसे सुरक्षित रह सकते हैं?

मुँह की सैंकड़ो बीमारियों में से ही एक है मसूड़ों की बीमारी। हमारे मसूड़े हमारे मुँह का वो अंग हैं जो हमारे दाँतों को अपनी जगह पर बनाए रखते हैं. यदि इन मसूड़ों में कोई तकलीफ हुई तो दाँत भी सही जगह पर नहीं रह पाएंगे. जिसकी वजह से पूरे शरीर को अलग-अलग तरह की बीमारियाँ हो सकती हैं.

क्या है मसूड़ों की बीमारी?

मसूड़ों की बीमारी के कई चरण होते हैं। शुरूआती चरण में इसको जिंजिवाइटिस कहते हैं. इस चरण में मसूड़ों में सूजन आ जाती है और उनसे खून आने लगता है. खून ब्रश या फ्लॉस करते समय निकलता है। डॉक्टर से मसूड़ों की जाँच कराते वक्‍त अगर खून बहता है तो यह भी जिंजिवाइटिस का लक्षण हो सकता है।

इस बीमारी का अगला चरण है परिदंतिका (पेरिओडोन्टाइटिस)। इसमें दाँतों को मज़बूती देनेवाली चीज़ें जैसे, मसूड़ों के ऊतक (टिशु) और हड्डियाँ खराब होने लगते हैं। शुरू-शुरू में इसका पता नहीं चलता। फिर धीरे धीरे ये फ़ैलने लगता है और एक्स-रे में यह पूरी तरह दिखने लगता है।
इसकी कई निशानियाँ हैं-

मसूड़ों में जगह (गम-पॉकेट) बनना

दाँतों का हिलना, दाँतों के बीच जगह बनना

मुँह से बदबू आना

मसूड़ों का दाँतों से अलग होना जिससे दाँतों का लंबा दिखाई देना

मसूड़ों से खून बहना

यदि आप इनमे से कोई भी लक्षण अपने मसूड़ों में देखें तो तुरंत ही अपने नज़दीकी दन्त चिकित्सक के पास जाएँ और जल्द से जल्द इलाज शुरू करवाएं.