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गुरु गोबिंद प्रकाश पर्व: …तो इसलिए गुरु गोबिंद सिंह हमेशा अपने साथ रखते थे बाज़ को

13 जनवरी को पूरे भारतवर्ष में लोहड़ी और गुरु गोबिन्द सिंह जयंती का उत्सव मनाया जाएगा. दोनों ही पर्व सिख धर्म के लोगों के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं.सिखों के दसवें गुरु गोबिन्द सिंह ने आज के ही दिन खालसा पंथ की स्थापना की थी और उनका जन्म बिहार के पटना में 1666-1708 के बीच हुआ था.लेकिन पटना साहिब में गुरु गोबिंद सिंह जयंती को 13 जनवरी को मनाया जाएगा.आपने आमतौर पर गुरु गोबिदं सिहं की तस्वीर में उनके हाथ पर बैठे बाज को कई बार देखा होगा और आपके मन में सवाल भी आया होगा कि आखिर इस बाज के पीछे की कहानी क्या है.तो चलिए आज हम आपको उस बाज के बारे में बताते हैं…

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गुरु गोबिंद सिंह रखते थे अपने पास बाज को

गुरु गोबिन्द सिंह जी जो भी करते थे उसके पीछे समाज के लिए कोई संदेश अवश्य होता था इसके पीछे भी था. उनका मानना था कि बाज़ को कभी गुलाम बना कर नहीं रख सकते हैं ना ही वह पिंजड़े में बंद रह सकता है. वह या तो पिंजरा तोड़ देगा या मर जाएगा लेकिन दास नहीं रहेगा. बाज़ कभी किसी का किया हुआ शिकार नहीं खाता.बाज़ बहुत ऊपर उड़ता है लेकिन इतना ऊपर उड़ने के बाद भी उसकी दृष्टि हमेशा धरती पर ही होती है.बाज़ सारी जीवन कभी अपने पास आलस नहीं आने देता.बाज़ कभी अपना घर या घोंसला नहीं बनाता 18 वीं सदी में सिक्ख समाज भी ऐसा ही करता था.बाज़ दूसरे पंछियों के समान हवा के साथ नहीं उड़ता बल्कि हवा के विपरीत उड़ता है.

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