आमजन के लिए समस्या बनी डॉक्टरों की हैंडराइटिंग, कई लोगों की जान पर भारी

डॉक्टरों की हैंडराइटिंग आमजन के लिए हमेशा ही एक अबूझ पहेली की तरह रही है। कई बार यह हैंडराइटिंग मरीज के लिए भारी नुकसान की वजह भी बन जाती है। टाइम पत्रिका की एक रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टरों की गलत हैंड राइटिंग के कारण हर साल करीब 7 हजार अमेरिकी लोग अपनी जान गंवा देते है। दरअसल, डॉक्टरों की हैंडराइटिंग में लिखी दवाइयां अक्सर फार्मासिस्ट को समझ नहीं आती और वह ऐसी स्तिथि में मरीज को गलत दवा दे देते है।

रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टरों की अबूझ लिखावट की वजह से लगभग 15 लाख लोगों को शारीरिक/आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। भारत में भी पिछले साल दिसंबर महीने में दिल्ली के मयूर विहार के एक डॉक्टर का प्रैक्टिस लाइसेंस निरस्त कर दिया था क्योंकि उसकी समझ में न आने वाली राइटिंग पर मेडिकल काउंसिल में शिकायत की गई थी। दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में एक मामले में न्यायाधीश डॉक्टर की राइटिंग समझ नहीं पाए थे।

दिल्ली मेडिकल काउंसिल के सेक्रेटरी डॉक्टर गिरीश त्यागी बताते है कि सभी डॉक्टरों को दवाएं, उनकी डोज और उपचार लिखने के दौरान अंग्रेजी के बड़े अक्षरों को लिखने का सुझाव दिया जा चुका है। जिसके बाद आज भारी संख्या में डॉक्टर दवाओं के नाम कैपिटल लेटर में ही लिखते हैं। लेकिन इस विषय में जागरूकता के अभाव के चलते अभी भी कई डॉक्टर अपने हिसाब से दवाएं लिख देते हैं।

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