हार्ट पेशेंट महिलायें इन बातों का रखे खास ध्यान

दिल की बीमारी से पीड़ित गर्भवती महिलाओं के नॉर्मल प्रसव पर बहुत ज्यादा जोर दिया जाना चाहिए। आम तौर पर तीमारदार सिजेरियन पर जोर देते हैं, लेकिन ऑपरेशन के दौरान बेहोशी की डोज दिल पर असर कर सकती है। इससे हार्ट फेल की आशंका रहती है। यह जानकारी शनिवार को लारी कार्डियॉलजी की ओर से साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में शुरू हुए यूपीसीएसआई के 23वें वार्षिक अधिवेशन कार्डिकॉन-2017 में डॉक्टरों ने दी।

दो दिवसीय अधिवेशन के पहले दिन लारी कार्डियॉलजी के एचओडी ने बताया कि प्रदेश में 20% महिलाओं में सांस फूलने की समस्या सामने आई है। ऐसा हार्ट वॉल्व सिकुड़ने और दिल की नसें फैलने के कारण भी होता है। इस समस्या को गंभीरता से न लेने के कारण उन्हें गर्भधारण करने में बहुत दिक्कत होती है। गर्भवती महिलाओं में ऐसी दिक्कत होने पर उनके हार्ट वॉल्व को बैलून विधि से फुलाया जाता है। उन्होंने बताया कि जिन महिलाओं को सांस फूलने और बीपी की परेशानी भी है, उन्हें प्रेगनेंसी प्लान करने से पहले एक बार हार्ट चेकअप अवश्य करवाना चाहिए। सौ जन्मजात विकृत बच्चों में एक से दो को हार्ट अटैक की आशंका रहती है, क्योंकि उनके दिल की नस फेफड़े में चली जाती है।

  • रोबॉट से जटिल सर्जरी भी आसान

मेदांता हॉस्पिटल के संस्थापक ने बताया कि हार्ट, डैमेज नर्व और आर्टरी की सर्जरी काफी जटिल होती है। आमतौर पर डॉक्टर इसकी सर्जरी करने से मना कर देते हैं और मरीजों को दवाओं पर निभर रहना पड़ता है। हालांकि, रोबोट द्वारा बाइपास सर्जरी बहुत ज्यादा आसान होती है। केजीएमयू के कुलपति ने कहा कि कई अस्पतालों में हार्ट का इलाज करने के लिए मशीनें और संसाधन तो हैं, लेकिन डॉक्टर नहीं हैं। ऐसे में कार्डियॉलजिस्ट को महीने में कुछ दिन दूसरे अस्पतालों के डॉक्टरों को ट्रेनिंग देने के लिए निकालने चाहिए।

  • गठिया से वॉल्व पर असर

वाराणसी से आए डॉ ने बताया कि गले में संक्रमण और गठिया बाई से हार्ट की नसें और वॉल्व खराब होने की आशंका रहती है। इस कारण ऐंटिजन अक्सर ऐंटिबॉडी में तब्दील हो जाते हैं, जो वॉल्व पर असर डालते हैं।

  • फ्रेंच फ्राइस और रेड मीट दिल के लिए घातक

लारी कार्डियॉलजी के ने बताया कि फ्रेंच फ्राइस और रेड मीट ज्यादा खाने से कॉलेस्ट्रॉल ज्यादा बनता है, जो दिल पर असर डालता है। इससे घबराहट, पसीना आना, बीपी की समस्या और नस ब्लॉकेज हो सकती है। इससे बचाव के लिए नियमित टहलने के साथ पौष्टिक आहार लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि हार्ट की नस को अंदर से देखने के लिए इंट्रावैस्क्युलर अल्ट्रासाउंड जांच की जाती है। यह जांच लारी में होती है।

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