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घर और कार्यस्थल में आरोग्य स्थान पर असर होने से पूरे परिवार पर भी पड़ता है असर

इंटरनेट डेस्क। कलयुग में वास्तु दोष ज्यादा प्रभावी हो रहा हैं, हर इंसान सेहत संबंधी परेशानियों से जूझ रहा है। यह कहीं वास्तु दोष तो नहीं। हां कुछ हद तक वास्तु दोष से भी सेहत संबंधी परेशानियां हो सकती है। लेकिन इनका आपको शीघ्र ही उपचार करना होगा। आप गंभीर समस्याओं में घिर सकते हैं।

संस्कृत में घर के स्वास्थ्य के स्थान को `आरोग्यस्थान’ कहा जाता है। इसका पूरे परिवार पर असर पड़ता है।

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आपको बता दें कि सेहत जीवन का एक अविभाज्य घटक है। संतो के कथन के मुताबिक `स्वास्थ्य ही संपत्ती है’ जो हरएक के लिए संपूर्ण सच है । एक स्वस्थ मन स्वस्थ शरीर में वास करता है ये आज के तनावपूर्ण जीवन का उचित ज्ञान है।

अगर परिवार के किसी सदस्य के स्वास्थ्य को लेकर कोई समस्या है तब पूरा परिवार अस्वस्थ होता है और उनकी दैनिक दिनचर्या में हलचल हो जाती है । उससे भी अधिक, प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से घर तथा कार्यस्थल से संबधित होने की वजह से इन परेशानियों से सभी के मन की शांती में बाधा उत्पन्न होती है।

जीवन खतरों से भरा
आज के आधुनिक युग में हर कोई परेशान है, उनका जीवन खतरों से भरा है। हर जगह लोग बीमारी या और किसी कारण से पीड़ित हैं । कुछ परिवारों में, हालांकि उपर से भले ही दिखाई न दें लेकिन परिवार में कोई न बिना वजह कोई किसी न किसी बीमारी से परेशान है। इसलिए परिवार के सदस्यों को यह विचार आता है और उसको ध्यान में भी रखते हैं कि बार बार उनका ही स्वास्थ्य क्यूं बिगड रहा है और उनको ही बुरे समय क्यूं आता है ?

इन वजह से आती हैं पीडा
संस्कृत में घर के स्वास्थ्य के स्थान को `आरोग्यस्थान’ कहा जाता है। इसका पूरे परिवार पर असर पड़ता है। कई घरों में आरोग्यस्थान स्नागृह, शौचालय और उपयोगिता के कमरे की कारण से अवरोधित होते हैं जिससे घर और कार्यस्थल में आरोग्यस्थान पर असर होने से परिवार पर उल्लेख की हुई हमेशा विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएँ घटित होती है तथा उसकी वजह से पीड़ा तथा तनाव उत्पन्न होता है।

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