बाजार में बिकवाली का Mutual Fund पर कैसे पड़ रहा असर, यहां समझें

सप्ताह के दूसरे दिन यानी मंगलवार को भले ही भारतीय शेयर बाजार में रौनक रही हो लेकिन अब भी संकट के बादल कम नहीं हुए हैं। सालभर के निचले स्तर तक जाने के बाद शेयर बाजार में गिरावट का असर Mutual Fund NAV (नेट एसेट वैल्यू) पर भी देखने को मिल रहा है।

यह उन निवेशकों के लिए थोड़ा झटका है, जिन्होंने पहले से Mutual Fund पर दांव लगा रखा है। हालांकि, नए निवेशकों के लिए कहीं ना कहीं फायदे का सौदा है क्योंकि उनके लिए ज्यादा मुनाफा कमाने का अवसर होगा। बहरहाल, Mutual Fund NAV क्या होता है, पहले ये समझ लेते हैं।

क्या है Mutual Fund NAV: दरअसल, Mutual Fund स्कीम में कई Units होती हैं। इन Units को अलग-अलग निवेशकों द्वारा सामूहिक रूप से आयोजित किया जाता है। हर Unit के मान को नेट एसेट वैल्यू के रूप में जाना जाता है। हर शेयर की कीमत के समान, NAV प्रत्येक म्यूचुअल फंड Unit की कीमत को संदर्भित करता है।

बाजार में उतार-चढ़ाव वाले किसी भी शेयर की कीमत की तरह म्यूचुअल फंड का NAV भी बदल जाता है। हर दिन क्लोजिंग के वक्त NAV अपडेट किया जाता है निवेशकों पर कैसे पड़ रहा असर: जिन निवेशकों ने Mutual Fund स्कीम्स में दांव लगाया है उन्हें शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव की कीमत चुकानी पड़ रही है।

मई में Mutual Fund के एएमसी यानी एसेट अंडर मैनेजमेंट करीब 2 फीसदी कम रहा है। इसकी वजह डेट फंड में बिकवाली है दरअसल, आरबीआई ने रेपो रेट में बढ़ोतरी की है, इसके बाद से ही डेट फंड में बिकवाली का दौर देखने को मिल रहा है। जानकारों के मुताबिक यह पैटर्न बताता है कि निवेशक अपने काम के लिए बैंकों से लोन लेने की बजाए Mutual Fund में छोटी अवधि के लिए निवेश की गई रकम को निकाल रहे हैं।

आपको यहां बता दें कि Mutual Fund में छोटी अवधि के लिए जो निवेशक दांव लगाते हैं, उसे डेट फंड की कैटेगरी में रखा जाता है। ये वो फंड होता है जो सुरक्षित जगह निवेश किया जाता है और इसका रिटर्न भी सुनिश्चित होता है। इसमें आप जब चाहें पैसे निकाल सकते हैं।

हालांकि, एक बात ये भी है कि सिस्टमेटिक इनवेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है और निवेश का आंकड़े में भी इजाफा हो गया है। निवेश का पैटर्न देखने पर मालूम होता है कि यह निवेश लॉन्ग टर्म के लिए है और हाइब्रिड एसेट मैनेजमेंट को चुना जा रहा है।

क्या वजह है: एक्सपर्ट के मुताबिक एसआईपी में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए यह अच्छा मौका है। शेयर बाजार जब गिरावट के दौर में रहता है तब दांव लगाने पर तगड़ा रिटर्न मिलने की उम्मीद की जाती है।

विदेशी शेयरों में निवेश पर राहत: इस बीच, पूंजी बाजार नियामक सेबी ने म्यूचुअल फंडों को फिर से विदेशी शेयरों में निवेश करने की अनुमति दी है। यह निवेश उद्योग के लिए सात अरब अमेरिकी डॉलर की कुल अनिवार्य सीमा के भीतर किया जा सकेगा। यह फैसला अंतरराष्ट्रीय शेयरों का मूल्यांकन नीचे आने के मद्देनजर किया गया।

सेबी ने जनवरी में म्यूचुअल फंड घरानों से कहा था कि वे विदेशी शेयरों में निवेश करने वाली योजनाओं में नये ग्राहक बनाना बंद कर दें। ग्राहक बनाने पर रोक का निर्देश मुख्य रूप से म्यूचुअल फंड उद्योग द्वारा विदेशी निवेश के लिए तय सात अरब अमेरिकी डॉलर की अनिवार्य सीमा को पार करने के कारण जारी किया गया था।

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