ऐसे बचें एक्जीमा से

संक्रमण अक्सर कुछ सेकेंड या मिनटों में आपको शिकार बना लेते हैं। कई बार तो ऐसे स्रोतों के जरिए, जिन्हें लेकर आपके दिमाग में कोई शक ही नहीं होता। यही कारण है कि अनजाने में संक्रमण रिपीट भी होता रहता है। जानिए एक्जीमा के संदर्भ में ऐसे ही कुछ ट्रिगर्स, जिनसे सावधानी  रखकर तकलीफ से बचा जा सकता है।

गर्म पानी: यह कई लोगों की आदत में होता है कि वे नहाने के लिए बहुत गर्म पानी का उपयोग साल भर करते हैं। साल भर गर्म पानी से नहाना उतना बुरा नहीं है जितना इस पानी के तापमान का जरूरत से ज्यादा बढ़ा होना है। विशेषज्ञों के अनुसार अध्ािक गर्म पानी त्वचा को नुकसान पहुंचाने के साथ ही एक्जीमा के लिए निमंत्रणदायी स्थितियां भी उपजा सकता है। इसलिए नहाने या हाथ धोने के लिए हमेशा गुनगुने पानी का प्रयोग करें। इसके बाद त्वचा को हल्के से थपथपाकर पोंछें, रगड़ें नहीं। फिर इस पर कोई अच्छा लोशन लगाएं ताकि त्वचा की नमी खोने न पाए। इसी तरह रूखी-सूखी हवा में भी त्वचा का ध्यान रखें।

कैमिकल्स: घर हो या बाहर, दिन भर में चाहे-अनचाहे आप कई तरह के रसायनों के संपर्क में आते हैं। इनमें किसी फैक्ट्री या व्यवसायिक काम में प्रयोग में आने वाले रसायनों के साथ ही, घरों में सफाई के लिए प्रयुक्त रसायन, परफ्यूम्स, डियो आदि में मौजूद कैमिकल्स आदि शामिल हैं। इसके अलावा साबुन, डिटर्जेंट और शैम्पू में प्रयुक्त रसायन भी दिक्कत दे सकते हैं।

त्वचा यदि लंबे समय तक लगातार इनके संपर्क में आती है, तो खतरे में पड़ सकती है। इससे एक्जीमा उभर सकता है। इसलिए खास तौर पर एक्जीमा की समस्या होने पर घर में सफाई करते समय या रसायनों का प्रयोग करते समय ग्लव्स पहनें। परफ्यूम्स, एयर फ्रेशनर्स, सुगंध्ाित मोमबत्ती, फैब्रिक सॉफ्टनर्स आदि का प्रयोग बंद कर दें और खास तौर पर सिगरेट के धूये से दूर रहें। माइल्ड साबुन या शैम्पू का प्रयोग करें।

*धूप और सूरज: तेज ध्ाूप हो या गर्मी के कारण बहता पसीना, ये दोनों ही त्वचा संबंध्ाी तकलीफों का कारण बन सकते हैं। सनबर्न त्वचा में सूजन पैदा करके एक्जीमा की स्थिति में पहुंचा सकता है। इसलिए सनस्क्रीन का उपयोग अवश्य करें। यदि आपको सामान्य सनस्क्रीन सूट नहीं होता हो, तो मिनरल युक्त (जिंक ऑक्साइड या टाइटेनियम डायऑक्साइड) सनस्क्रीन का उपयोग करें। वहीं एक्सरसाइज के बाद पसीना आने पर भी सतर्कता और सफाई का ध्यान रखें।

कपड़े: कई बार कुछ विशेष मटेरियल से बने कपड़े, जैसे ऊनी या सिंथेटिक कपड़े, तकलीफ दे सकते हैं। इसी तरह बाजार से लाकर बिना धोय पहने गए कपड़े भी समस्या का कारण बन सकते हैं। इसलिए ऐसे कपड़ों का चुनाव करें, जो पसीना सोखने और हवा को त्वचा तक पहुंचने में मदद कर सकें।

मानसिक उलझनें: तनाव, स्ट्रेस, एंग्जायटी आदि जैसी स्थितियां त्वचा के लिए भी नुकसानदायक हो सकती हैं। ये एक्जीमा की स्थिति को और बिगाड़ सकती हैं। इसलिए इन उलझनों को मेडिटेशन आदि के जरिए सुलझाएं और मानसिक स्थिति को अच्छा बनाए रखें।

एलर्जी या सेंसिटिविटी: पालतू पशुओं, पॉलेन्स या धूल आदि से होने वाली एलर्जी या किसी विशेष खाद्य जैसे मूंगफली, दूध, सोया या गेहूं से होने वाली सेंसिटिविटी जो बच्चों में एक्जीमा के लिए ट्रिगर का काम कर सकती है। ऐसे में सही जानकारी, जांचों और मार्गदर्शन से तकलीफ को नियंत्रण में रखा जा सकता है।

लार: बहुत छोटे बच्चों में लार गिरते रहने से भी गालों, ठोढ़ी, गर्दन व मुंह के आसपास एक्जीमा की स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए बिब के प्रयोग और बिब की सफाई को लेकर सतर्क रहें।

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