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दफ्तर बनाम घर: इस तरह बैठाएं सामंजस्य

शादी और नौकरी दोनों ही एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। नौकरी के बिना शादी नहीं की जाती है और शादी बिना नौकरी के बेकार है। इस तरह देखा जाए तो शादी और नौकरी दोनों को ही संभालना बहुत जरूरी है। लेकिन कई बार देखने में ये आता है कि पुरुष दोनों को संभालने में इस तरह फंस जाता है कि वह कई बार खुद को कोसने लगता है तो कई बार अपनी पत्नी को और कई बार अपने बाॅस को। इससे क्या होगा? कुछ नहीं। इसलिए बेहतर है कि दफ्तर और घर के बीच सामंजस्य बैठाना सीखें।
-शादी और नौकरी दोनों ही जिम्मेदारी का दूसरा नाम है।
-ये ज्यादा तब बढ़ जाती है जब दोनों ही पार्टनर नौकरी करते हैं और उनका बिजी रुटीन रहता है।
-ऐसे में दोनों के लिए अपनी-अपनी जिम्मेदारियों को समझना और उन्हें बांट कर खुशी से पूरा करना जरुरी है।
-ऐसा करने पर ही आप दोनों के बीच काम का दबाव नहीं बढ़ेगा और आप एक दूसरे की मदद भी कर पाएंगे।
-अक्सर आप अपने पार्टनर के साथ डिनर या बाहर घूमने का प्लान तो बना लेते हैं लेकिन ऑफिस का एक कॉल आते ही उसे कैंसिल भी कर देते हैं।
-ऑफिस का काम जरूरी तो होता है लेकिन इतना भी नहीं जिसके लिए हर बार आप अपने पार्टनर के साथ बनाये प्लान्स को बीच में ही छोड़ दे।
-दोनों के महत्व को समझेंगे तो आप आसानी से सही निर्णय ले पाएंगे।

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