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मानवाधिकार सिर्फ एक नारा नहीं बल्कि एक संस्कार होना चाहिए: पीएम मोदी

नई दिल्ली: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोगी की रजत जयंती समारोह में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा की “मानवाधिकार सिर्फ एक नारा नहीं बल्कि एक संस्कार होना चाहिए जो की सबमे दिखे”| इसके अलावा मोदी ने कहा की “बीते चार सालों में शोषित, दलित और पीड़ित लोगो के उत्थान के लिए जो कार्य हुए है वो बहुत बेहतर है| जो भी योजनायें बनी है उनका लक्ष्य इन वर्गों को ऊपर उठाना है|

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गिनाई योजनाये– पीएम ने कहा कि गरीब को खुले आसमान के नीचे, मौसम के थपेड़े सहने पड़े, ये भी तो उसके अधिकार का हनन ही है| इस स्थिति से उसको बाहर निकालने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हर बेघर-गरीब को आवास देने का अभियान चल रहा है| अब तक सवा करोड़ से अधिक भाई-बहनों को घर का अधिकार मिल भी चुका है| शौचालय न होने की मजबूरी में, जो अपमान वो गरीब भीतर ही भीतर महसूस करता था, वो किसी को बताता नहीं था| विशेषतौर पर मेरी करोड़ों बहन-बेटियां, उनके लिए ये Dignity से जीने के अधिकार का हनन तो था ही बल्कि जीने के अधिकार को लेकर भी गंभीर प्रश्न था|

 

इसके अलावा मोदी ने ई-कोर्ट की बात की और कहा की इसकी सहायता से केस से जुडी जानकारियां आदि आसानी से मिल जाती है|

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