शिशु के लिये माँ के दूध का महत्व

डब्ल्यूएचओ ने मदर्स को सलाह दी है कि वे बच्चों को पहले छह महीने केवल स्तनपान करायें क्योंकि मां का दूध और स्तनपान बच्चों के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। शिशु के लिये मां का दूध सबसे उत्तम, आसान और पोषण का सबसे आसानी से उपलब्ध स्रोत है। यह टाइप 2 प्रकार की डायबिटीज के खतरे को कम कर सकता है साथ ही साथ कुछ खास प्रकार के स्तन और गर्भाशय के कैंसर को भी।

‘‘मां का दूध शिशुओं को पर्याप्त पोषण प्रदान करता है। यह विटामिन, प्रोटीन और फैट का लगभग सही मिश्रण है। साथ ही यह आसानी से पचने योग्य स्थिति में उपलब्ध होता है। मां के दूध में इम्यूनोग्लोब्यूलिन्स और एंटीबॉडीज होती हैं जोकि शिशु को वायरस और बैक्टीरिया से लडऩे में मदद करते हैं। साथ ही जो शिशु छह महीने तक सिर्फ माँ का दूध पीते हैं उन्हें कान का इंफेक्शन, श्वसन से जुड़ी बीमारियां और डायरिया की शिकायत बहुत कम होती है।’’

‘‘स्तनपान कराने की स्थिति से सामंजस्य बिठाने के दौरान जब आप स्तनपान करा रहे हों तो उसकी साफ-सफाई का ध्यान रखना भी जरूरी होता है। स्तनपान से जुड़े किसी भी प्रकार के इंफेक्शन से बचने के लिये अपने स्तनों और निपल्स को साफ करें। इसके लिये आपको केवल अपने स्तनों को साफ करना है और निपल केयर बटर लगाना है, जिसमें कोकम बटर और वर्जिन कोकोनट ऑयल हो।

यह रूखे, क्रैक और निपल की सूजन में राहत पहुंचाता है और उसे ठीक करता है। स्तनपान के बाद किसी भी प्रकार के लीक और चिपचिपाहट से बचने के लिये आप नर्सिंग वाइप्स का प्रयोग कर सकती हैं, जोकि कोकोनट ऑयल से भरपूर हो। अपने निपल्स को साफ करने के लिये सिंथेटिक प्रोडक्टस से बचें। निपल की सूजन, क्रैक और तत्काल साफ-सफाई के लिये ऐसे प्रोडक्ट चुनें जिनमें प्राकृतिक चीजें हो।’’

यह सलाह दी जाती है कि अपने शिशु को जितना हो सके उतना स्तनपान करायें, हर दो घंटे पर या फिर इससे ज्यादा क्योंकि मां का दूध तुरंत पच जाता है। अपने बच्चे को स्तनपान (चाहे स्तनपान करा रहे हों या फिर बोटल से) कराने के लिये शंात कमरा चुनें, किसी भी प्रकार के शोरगुल या ध्यान भटकाने वाली चीज से दूर रहें। कुर्सी या काउच पर अपने आस-पास कुशन की मदद से खुद को और अपने बच्चे को आराम की स्थिति में रखें।