बुखार में सिर पर पट्टी रखने से पहले जांच लें पानी का तापमान, वरना…

मौसम चाहे सर्दियों का हो या गर्मियों का मौसम, जब भी बुखार होता है तो ठंडे पानी की पट्टिया हम सिर पर रखते ही है। बुखार होने पर डॉक्टर भी हमें यही बोलते है कि सिर पर पट्टियां रखे ऐसा करने से बुखार बहुत कम होता है। लेकिन क्या बुखार में सिर पर पट्टियां रखना कितना सही है आप जानते है ? क्या आप जानते है कि ये करना कितना सही है या कितना गलत? आज हम आपको बताने जा रहे है इसके बारे में..

बुखार में पट्टियों का काम- जब बुखार 101 डिग्री फैरेनहाइट से ज्यादा होता है तो हालत गंभीर हो जाती है और उसके बाद इसके 103 डिग्री फैरेनहाइट तक पहुंचने पर बहुत ज्यादा घबराहट होती है। ऐसे में डॉक्टर बुखार के लिए दवाएं तो देते हैं लेकिन कई बार दवाएं खाने के बावजूद शरीर का तापमान सामान्य नहीं होता है। ऐसे में ठंडे पानी की पट्टियों या स्पंज को माथे पर रखने से बुखार को कम करने की कोशिश की जाती है।

माना जाता है कि अगर बुखार 102 डिग्री फैरेनहाइट से ज्यादा हो जाए तो उसे नियंत्रित करना बहुत ज़रूरी हो जाता है , अगर ऐसा नहीं किया तो इससे दौरा भी पड़ सकता है। ठंडे पानी की पट्टियां या स्पंज करने से तापमान कम करके मरीज़ को राहत दिलाई जा सकती है। छोटे बच्चों और बुज़ुर्गों के साथ ये तरीका अपनाया जा सकता है क्योंकि उन्हें बुखार बहुत तेज होने पर दौरा पडऩे का आशंका अधिक रहता है।

बर्फ या बर्फ के पानी का उपयोग नहीं करें- पट्टी करने के लिये बर्फ के पानी का उपयोग नहीं करना चाहिये। इसके लिये हमेशा ताज़ा पानी ही काम में लेना चाहिए।

कब करना चाहिए बर्फ के पानी का उपयोग- बर्फ के पानी का उपयोग केवल तभी करना चाहिए जब बुखार 104 से105 डिग्री फैरेनहाइट तक हो गया हो। ध्यान रहे कि स्पंजिंग बुखार के लिए स्थायी उपचार नहीं है बल्कि तापमान को सामान्य करने का तरीका है।