भारत जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध योगदान बढ़ाने की प्रतिबद्धता निर्धारित की

मंत्रिमंडल ने जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र संधि-व्यवस्था (यूएनएफसीसीसी) को सूचित किए जाने वाली भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित अद्यतन योगदान (एनडीसी) मसौदे को मंजूरी दे दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल बुधवार को हुई बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया है कि जलवायु को प्रभावित करने वाली ग्रीन-हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी के बारे में भारत का अद्यतन एनडीसी पेरिस में हुई संधि के अनुसार अंतराष्ट्रीय प्रयासों में भारत के योगदान को बढ़ाने का प्रयास है।

बयान में कहा गया है, “ यह कदम भारत को कम उत्सर्जन वाली आर्थिक वृद्धि के मार्ग पर लाने में सहायक होगा। इससे देश के हितों की रक्षा होगी और यूएनएफसीसीसी के सिद्धांतों और प्रावधानों के आधार पर भारत के भविष्य के विकास की आवश्यकताओं का भी संरक्षण होगा। ”

भारत ने ब्रिटेन में ग्लासगो में यूएनएफसीसीसी सदस्यों के सम्मेलन-सीओपी 26 में दुनिया को पांच अमृत तत्व (पंचामृत) का प्रस्ताव रखकर जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध अपनी कार्रवाई को तेज करने की मंशा जतायी थी।

भारत की राष्ट्रीय स्तर पर तय की गयी यह नयी प्रतिबद्धता ग्लास्गो में घोषित ‘पंचामृत’ के अनुरूप है जिसमें भारत के जलवायु परिवर्तन संबंधी लक्ष्यों को ऊंचा किया गया है। सरकार का कहना है कि भारत की प्रतिबद्धताओं का यह अद्यतन संस्करण भारत के 2070 तक नेट-शुद्ध रूप से शून्य उत्सर्जन के के दीर्घकालिक लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में भी एक कदम है।

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