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संविधान से जुड़ी वो खास बातें जो हर नागरिक के लिए है जरूरी

26 नवम्बर संविधान दिवस का वो सुनहरा दिन जिसकी भारतीय इतिहास में एक खास और अहम भूमिका है। पूरा देश आज संविधान दिवस मान रहा है। आज के दिन ही इसे संविधान सभा में पारित किया गया था।

भारत सरकार ने सभी नागरिकों को आज संविधान पढ़ने की राय दी है ताकि सभी इसे जान सके और समझ सकें। आइए जानते है संविधान से जुड़ी वो सारी खास बातें जो हर भारतीय नागरिक को पता होनी चाहिए।

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संविधान को बनाने के लिए एक सभा का गठन किया गया जिसके अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद को चुना गया। संविधान सभा ने 2 वर्ष 11 माह 18 दिन में कुल 114 दिन बैठकें की। भारतीय संविधान विश्व की सबसे बड़ी संविधान है जिसमे 465 अनुच्छेद और 12 अनुसूचियाँ है। इसे 22 भागों में बांटा गया है।

संविधान में साफ साफ लिखा गया है कि देश का अपना कोई भी आधिकारिक धर्म नहीं होगा और ना ही यह किसी धर्म को बढ़ावा देगा, किसी भी धर्म से भेदभाव यह एक बड़ा अपराध माना जाएगा। देश के लिए सभी धर्म समान है।

जिस दिन संविधान को सदन के सदस्यों के द्वारा पास किया गया उस दिन देश में बारिश हो रही थी इसलिए अंदर बैठे सदस्यों के द्वारा इस दिन को और भी शुभ माना गया। भारतीय संविधान की वास्तविक प्रति प्रेम बिहारी नारायण ने लिखी थी और इस के हर एक पन्ने को शांति निकेतन के कलाकारों ने अपने हाथों से सजाया था।

हाथ से लिखे संविधान पर कुल 284 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए थे जिसमें 15 महिलाएं भी शामिल थी।

संविधान में लिखे प्रस्तावना को अमेरिकी संविधान से लिया गया था इसे भारतीय संविधान की आत्मा भी कही जाती है। भारतीय संविधान के प्रस्तावना की शुरुवात “we the people” से होती है। इस संविधान में अभी तक 124 बार संशोधन हो चुका है। 26 जनवरी 1950 को ही अशोक चक्र को राष्ट्रिय चिन्ह स्वीकार किया गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 जनवरी 2015 को यह घोषित किया था कि 26 नवम्बर का दिन देश संविधान दिवस के रूप में मानाएगा। आज देश का पाँचवाँ संविधान दिवस है।

संविधान ने दिये भारतीय नागरिकों को मौलिक अधिकार

मौलिक अधिकार उन अधिकारों को कहा जाता है जो कि व्यक्ति के जीवन में मौलिक होने के साथ साथ संविधान के द्वारा उन्हे दिये गए है जिसमे राज्य के द्वारा कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।

क्या होते है मौलिक अधिकार

इन अधिकारों को मौलिक इसलिए कहा जाता है क्यूंकी इन अधिकारों को भारतीय संविधान में खास जगह दी गयी है। इन अधिकारों में कोई भी बदलाव नहीं किया जा सकता। ये अधिकार व्यक्ति के विकास के लिए आवश्यक है। इनके अभाव से व्यक्ति का विकास रुक सकता है। इन अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता।

मौलिक अधिकार

भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार का वर्णन तीसरे भाग के अनुच्छेद 12 से 35 तक किया गया है। नागरिकों को 6 मौलिक अधिकार दिये गए है-

1. समानता का अधिकार : अनुच्छेद14 से 18 तक
2. स्वतंत्रता का अधिकार : अनुच्छेद 19 से 22 तक
3. शोषण के विरुद्ध अधिकार : अनुच्छेद 23 से 24 तक
4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार : अनुच्छेद 25 से 28 तक
5. सांस्कृतिक तथा शिक्षा सम्बंधित अधिकार : अनुच्छेद 29 से 30 तक
6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार : अनुच्छेद 32

अनुच्छेद     विवरण
36               परिभाषा
37               इस भाग में अंतर्विष्‍ट तत्‍वों का लागू होना
38               राज्‍य लोक कल्‍याण की अभिवृद्धि के लिए
सामाजिक व्‍यवस्‍था बनाएगा
39               राज्‍य द्वारा अनुसरणीय कुछ नीति तत्‍व
39क            समान न्‍याय और नि:शुल्‍क विधिक सहायता
40               ग्राम पंचायतों का संगठन
41               कुछ दशाओं में काम, शिक्षा और
लोक सहायता पाने का अधिकार
42               काम की न्‍यायसंगत और मानवोचित दशाओं
का तथा प्रसूति सहायता का उपबंध
43               कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि

अनुच्छेद     विवरण
43क           उद्योगों के प्रबंध में कार्मकारों का भाग लेना
44              नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता
45             बालकों के लिए नि:शुल्‍क और अनिवार्य शिक्षा
का उपबंध
46            अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्‍य
दुर्बल वर्गों के शिक्षा और अर्थ संबंधी हितों
की अभिवृद्धि
47            पोषाहार स्‍तर और जीवन स्‍तर को ऊंचा करने
तथा लोक स्‍वास्‍थ्‍य को सुधार करने का राज्‍य
का कर्तव्‍य
48           कृषि और पशुपालन का संगठन
48क     पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन और वन तथा
वन्‍य जीवों की रक्षा
49        राष्‍ट्रीय महत्‍व के संस्‍मारकों, स्‍थानों और वस्‍तुओं
का संरक्षण देना
50        कार्यपालिका से न्‍यायपालिका का पृथक्‍करण
51        अंतरराष्‍ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि

– गौतम झा 

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