कैंसर के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील है भारतीय, जानिए कैसे

चिकित्सीय विशेषज्ञों का यह कहना है कि लंबे समय तक बैठे रहने वाली जीवनशैली और खानपान की गलत आदतों से होने वाले मोटापे और शराब के सेवन के कारण भारतीयों पर आहार नली के कैंसर और इस बीमारी की अन्य किस्मों का बहुत ज्यादा खतरा है।

मोटापे की सर्जरी और सर्जिकल गेस्ट्रोएंटरोलॉजी में विशेषज्ञता रखने वाले बेंगलूर के एक डॉ के अनुसार, मोटापे से प्रभावित लोगों की संख्या बढ़ने के कारण और भारतीयों द्वारा शराब का ज्यादा सेवन किए जाने के कारण स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्या भी पैदा हो रही है और लोग अलग-अलग प्रकार के कैंसरों से बहुत जूझ रहे हैं।

बेंगलूर में मणिपाल अस्पताल और अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल से जुड़े डॉ का कहना है की, ‘मोटापे का संबंध विभिन्न किस्म के कैंसरों के बढ़े हुए खतरों से है। इनमें आहार नली, अग्नाशय, मलाशय, स्तन (मेनपॉज के बाद), गर्भकला, यकृत, थॉयराइड और पित्ताशय के कैंसरों के अलावा कई अन्य कैंसरों की आशंका भी शामिल है।’ हिंदुजा हैल्थकेयर से जुड़े जाने-माने लैप्रोस्कोपिक एंड बेरियाट्रिक सर्जन ने कहा कि भारत में मोटापा वैश्विक महामारी के रूप में फैल रहा है। भारतीय ज्यादा मोटे हो रहे हैं और सबसे ज्यादा पेट का मोटापा भी पाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘मोटे उतकों से ओस्ट्रोजन बनता है और इसके उच्च स्तर से स्तन और अंतरगर्भाश्य कला कैंसरों का खतरा बढ़ सकता है। मोटे लोगों में पाए जाने वाले बढ़े हुए इंसुलिन या इंसुलिन जैसे वृद्धि कारक लेप्टिन जैसी ट्यूमर की कई किस्मों को बढ़ावा दे सकती है।’ अमेरिकन इंस्टीट्यूट फॉर कैंसर रिसर्च की ओर से हाल ही में किए गए नए वैश्विक शोध में यह स्थापित किया गया है कि ज्यादा वजन वाले लोगों में आहार नली के कैंसर की सबसे सामान्य किस्म का खतरा पाया जाता है, जबकि शराब पीने वालों में इसी कैंसर की दूसरी सबसे बड़ी किस्म का खतरा रहता है।

चिकित्सीय विशेषज्ञों का यह मानना है कि एल्कोहल वाले पेय पदार्थों को सीमित करने से, ज्यादा फल-सब्जियां, सेम और अन्य वनस्पति पदार्थ खाने से और चलने-फिरने के लिए समय निकालने जैसी शारीरिक क्रियाएं कर के आज के माहौल में कैंसर का खतरा बहुत कम किया जा सकता है।

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