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इंदौर: दाऊदी बोहरा समाज के कार्यक्रम में शामिल हुए पीएम मोदी, बताई उनकी विशेषता

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इमाम हुसैन की शहादत के सम्मान में इंदौर में दाऊदी बोहरा समाज द्वारा आयोजित अशरा मुबारक़ा में शामिल हुए । इस मोके पर पीएम मोदी ने दाऊदी बोहरा समाज के विशाल जनसमूह को संबोधित किया।

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इमाम हुसैन के बलिदान का स्मरण करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इमाम हमेशा अन्याय के विरुद्ध खड़े हुए और शांति एवं न्याय की स्थापना के लिये शहीद हुए। उन्होंने कहा कि इमाम की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं । डॉक्टर सैयदना मुफद्दल सैफ़ुद्दीन के कार्य की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र के प्रति प्रेम एवं समर्पण उनकी शिक्षाओं की विशेषता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हर किसी को साथ लेकर चलने की संस्कृति भारत को अन्य सभी देशों से अलग बनाती है। उन्होंने कहा, “हम अपने भूतकाल पर गर्वित हैं, अपने वर्तमान पर विश्वास करते हैं एवं सुनहरे भविष्य के प्रति आशान्वित हैं।”

दाऊदी बोहरा समुदाय के योगदान को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि समुदाय ने हमेशा भारत की प्रगति एवं विकास में मुख्य भूमिका निभाई है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि समुदाय विश्व भर में भारतीय संस्कृति की ताकत के प्रसार का अपना महान कार्य जारी रखेगा ।

बोहरा समाज की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि समुदाय का लगाव पाना उनके लिये सौभाग्य की बात है। गुजरात का मुख्यमंत्री रहने के दौरान बोहरा समुदाय से मिली सहायता को याद करते हुए उन्होंने कहा कि समुदाय का प्रेम उन्हें इंदौर ले आया।

इस अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद थे। इससे पहले डॉक्टर सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन ने प्रधानमंत्री के अनुकरणीय कार्य के लिये उनकी प्रशंसा की एवं देश के लिये उनके कार्य हेतु उन्हें सफलता की शुभकामनाएं दी ।

गौरतलब है कि दाऊदी बोहरा समुदाय के सैयदना 53वें धर्मगुरु हैं। उनके 12 सितंबर से इंदौर में इमाम हुसैन की शहादत के महीने में धार्मिक प्रवचन चल रहे हैं। सैयदना पहली बार इंदौर आए हैं।

बोहरा समुदाय अपनी सफाई पसंदगी और पर्यावरण रक्षा की पहलों के लिए भी जाना जाता है। दाऊदी बोहरा मुख्यत: गुजरात के सूरत, अहमदाबाद, जामनगर, राजकोट, दाहोद, और महाराष्ट्र के मुंबई, पुणे व नागपुर, राजस्थान के उदयपुर व भीलवाड़ा और मध्य प्रदेश के उज्जैन, इन्दौर, शाजापुर, जैसे शहरों और कोलकाता व चैन्नै में बसते हैं। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के अलावा ब्रिटेन, अमेरिका, दुबई, ईराक, यमन व सऊदी अरब में भी उनकी अच्छी तादाद है। मुंबई में इनका पहला आगमन करीब ढाई सौ वर्ष पहले हुआ।

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