थायरॉइड से डरने के बजाय डटकर करें मुकाबला, पीडि़त मरीज अपनाएं ये दिनचर्या

वैसे तो थायरॉइड सुनने में आम बीमारी लगती है लेकिन, जरा लापरवाही से यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है। तेजी से वजन गिरना, भूख का बार बार लगना, धडक़न धीमी होना, तनाव जैसे लक्षण हमारे शरीर में उत्पन्न होने लगते हैं, ऐसे लक्ष्ण होने पर तुरंत डॉक्टर से जाचं करवाएं। अगर, आपके शरीर में ऐसी कोई भी दिक्कत आती हैं, तो आपको तुरंत ही चिकित्सक के पास जाकर शरीर की जांच करानी चाहिए और चिकित्सक के बताये अनुसार इलाज करवाना चाहिए।

हमारे गले में गोल कंठा जो अखरोट के समान होता है, यह थायरॉइड गं्रथि कहलाती है, यह गं्रंथि शरीर की कई चीजों को कंट्रोल करती है, जैसे बॉडी टैम्परेचर, थकान, नींद, पाचन तंत्र, लीवर जैसे सिस्टम को कंट्रोल करती है, थायरॉइड दो तरह के हार्मोन ग्रंथि उत्पन्न करती है टी3 और टी4 बनाती है।

थायरॉइड दो प्रकार की होती है, हाइपोथायरॉइडिज्म और हाइपरथायरॉइडिज्म हाइपो में वजन का बढऩा, भूख कम लगना, हाथ पांव में स्वेलिंग आना, सुस्ती और ठंड लगना और माहवारी का साइकिल बिगडऩा, और याददाश्त कमजोर होना जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं, जबकि हाइपरथायरॉइडिज्म में वजन कम हो जाना, बार बार भूख लगना, तनाव, किसी चीज पर ध्यान कंद्रित ना कर पाना, धडक़न कभी तेज होना कभी धीमी होना जैसी समस्याओं से सामना करना पड़ता है।

थायरॉइड जैसी खतरनाक बीमारी में जरा सी भूल हमारे स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं। इस बीमारी से बचने के लिए हमें केवल अपनी दिनचर्या को बदलना होगा, बस फिर क्या हैं हम थायरॉइड जैसी गंभीर बीमारी से छुटकारा प्राप्त कर सकते हैं। आइये, आज आपकी सही दिनचर्या बनाने के लिए कुछ उपाय बताते हैं।

थायरॉइड से ग्रस्त व्यक्ति को अपने शरीर में आयोडीन की मात्रा की जांच करानी चाहिए।

मेटाबॉलिज्म के सही प्रकार से कार्य करने के लिए हमारे शरीर में आयोडिन होना आवश्यक हैं। आयोडीन की मात्रा को कम न होने दें और टाईम टू टाईम चिकित्सक से जांच व परामर्श लेते रहें।

खाने में कार्बोहाइड्रेट व वसा को बिल्कुल न के बराबर कर दें और जितना हो सके गाजर, अंडे का सेवन करें जिससे विटामिन ए की मात्रा बढ़ सकें।

जितना हो सके भोजन में हरी सब्जियां और पौष्टिकता प्रदान करने वाली चीजों का ज्यादा से ज्यादा सेवन करना चाहिए।

दही व सेब का खाने में प्रयोग करे, जो हमारे शरीर में कई लाभकारी बैक्टीरिया उत्पन्न करते हैं। जो हमारी थायरॉइड की बीमारी में लाभकारी होते हैं।

रोज आधे घंटे प्राणायम जैसे हलासन, मत्स्यासन और सर्वांगासन करना चाहिए। दवाओं के साथ-साथ यह भी हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी हैं।

थायरॉइड से ग्रस्त मरीज को काली मिर्च का अधिक सेवन करना चाहिए। क्योंकि काली मिर्च थायरॉइड हॉर्मोन को कंट्रोल करने में बहुत फायदेमंद हैं।

चाहे काली मिर्च को पीसकर सेवन करे या ऐसे भी खा सकते हैं। परन्तु जितना हो सके काली मिर्च को अपने खाने में इस्तेमाल करें।

थायरॉइड के मरीज को भोजन टाईम पर ही करना चाहिए, भूखे नहीं रहना चाहिए। क्योंकि भूखे रहने से थायरॉइड ग्रंथि पर गलत असर पड़ता हैं। इसलिए भोजन सही समय करना चाहिए।

थायरॉइड से ग्रस्त मरीज को दूध में हल्दी मिलाकर पीना चाहिए। हल्दी से थायरॉइड कंट्रोल होता हैं।

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