Breaking News
Home / दुनिया / अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस पर इस साल की थीम है “तनाव में लोकतंत्र”

अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस पर इस साल की थीम है “तनाव में लोकतंत्र”

नई दिल्ली: बीते कई सालों से आप एक शब्द सुन रहे है लोकतंत्र, लोकतंत्र और आये दिन चर्चा में रहता है| कभी तो यह खतरे में आ जाता है और कभी यह छेड़ा जाता है| 15 सितम्बर को अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस मनाया जाता है और हर साल इसकी कोई ना कोई थीम होती है और इस साल इसकी थीम है “तनाव में लोकतंत्र”|

loading...

 

क्या है लोकतंत्र और आज इसके मायने– लोकतंत्र का अर्थ है जनता| जहाँ जनता ही सबकुछ होती है और जनता मतलब आप और हम जो सडको में चल रहे है, जो सीमा में है, जो सुबह से शाम तक अपने आस्तित्व की खोज में है| लोकतंत्र में जनता सरकार चुनती है, जनता जिसे चाहे उसे गद्दी में बिठाती है और जिसे चाहे हटा देती है क्योकि जनता के पास वोट देने का अधिकार है और वोट से सरकार बनती है| वही सरकार जो लोकतंत्र को खतरे में ले आई है| लोकतंत्र को खतरा कहे या जनता को एक ही बात है और जब जनता को खतरा है तो उसने इसे खुद चुना है क्योकि उसे ये चुनने का स्वतंत्र अधिकार था| आज के समय में लोकतंत्र की दुहाई देकर कोई देश का झंडा उठा लेता है| विरोध करने लगता है, आवाज उठाने लगता है| ये आवाज इसलिए नहीं उठाई जाती है की उसे न्याय चहिये या फिर वो अपने अधिकारों की रक्षा करना चाहता है बल्कि इसलिए उठाई जाती है क्योकि अब झंडा उठाने का ट्रेंड बन चुका है| आज आपके खिलाफ किसी ने लोकतंत्र की दुहाई देते हुए विरोध कर दिया तो कल आप भी लोकतंत्र का नारा बुलंद करेगे और उसका विरोध करेगे| फिर कोई तीसरा खड़ा होगा जो आप दोनों का विरोध करेगा और उसके मुह में भी एक ही शब्द होगा “लोकतंत्र”|

 

बार बार खतरे में क्यों चला जाता है लोकतंत्र– आपने अपने देश में अक्सर सुना होगा की लोकतंत्र खतरे में है| सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने कहा था की लोकतंत्र खतरे में है और आप इसे बचा लीजिए, कांग्रेस समेत बाकी विरोधी पार्टियाँ कहती है की लोकतन्त्र खतरे में है और आप इसे बचाइए| लेकिन ये खतरा उत्पन्न कहा से हो रहा है| ये खतरा भी वही है जो लोकतंत्र है| यानी की जनता यानी की भीडतंत्र| अब लोकतंत्र मजबूत नहीं है बल्कि भीडतंत्र मजबूत है और ये भीड़ लोकतंत्र की दुहाई देते हुए इसी का गला घोटने में अमादा है| जब ये भीड़ और इस भीड़ के आगे कुर्ता पहनकर चलने वाले एक शख्स में बदलाव होगा तो लोकतंत्र खुद-ब-खुद सुरक्षित हो जाएगा और फिर इसे कोई नुकसान नहीं होगा|

Loading...
loading...
Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *