Breaking News
Home / ट्रेंडिंग / International Men’s Day: पुरुषों के अधिकारों की रक्षा आपकी भी ज़िम्मेदारी

International Men’s Day: पुरुषों के अधिकारों की रक्षा आपकी भी ज़िम्मेदारी

जिस समाज में हम रहते हैं हमें से ज्यादातर लोग उसे पुरुष प्रधान कहते हैं । जिस वजह से हम जब भी अधिकारों की बात करते है तब अक्सर पुरुषों को उस श्रेणी से दूर रखते बाऊ क्योंकि हमें लगता है पुरुषों ने तो हमेशा राज किया उन्हें न्याय की क्या ज़रूरत। वो हिंदी फिल्मों में कहते है ना “मर्द को दर्द नहीं होता”। लेकिन क्या सच में दर्द नहीं होता? जवाब देना मुश्किल हो रही है। क्योंकि हमने कभी जाने की कोशिश ही नही की।

हमारे समाज में बचपन से ही पुरुषों को निडर और मजबूत बनना सिखाया जाता है। हम मान बैठे है कि पुरुषों के अंदर कोई सॉफ्ट फीलिंग होती ही नहीं, मगर इसका यह मतलब नहीं है कि उन्हें कोई समस्या नहीं है। सच तो यह है कि वो भी भेदभाव, सोषण और असमानता का शिकार होते है। उनकी बेचारगी कभी खत्म ही नहीं होती।

Loading...

अक्सर हर साल 8 मार्च को महिला दिवस मनाया जाता है जिसमें महिलाओं के अधिकार, उनके कर्तव्यों पर चर्चा की जाती है। उन्हें उपहार दे कर उनके लिए संवेनषीलता व्यक्त की जाती है। तो महिलाएं भी अब पीछे ना रहे, पुरुषों के अधिकारों की रक्षा करना अब आपकी भी ज़िम्मेदारी है।

इंटरनेशनल मेन्स डे! भला ऐसा भी कोई दिन होता है क्या? और अगर होता है तो इसकी ज़रूरत ही क्या है। पिछले कुछ दशकों में महिला अधिकारों, महिला मुद्दों पर नारीवादियों का इतना शोर मचा की उस आवाज़ में पुरुषों के अहम मुद्दे दब गए। पुरुष भी इंसान ही है, तो ज़ाहिर सी बात है वो भी परेशान और दुखी होते है, वो भी थकते है। फर्क बस इतना है कि हम उसे व्यक्त कर पाते है और उन्हें अपनी पीड़ा को शब्द देना नहीं आता। वह उसे अपने अंदर समेट लेते है। अगर वहीं मर्द कभी रो पड़े तो लोग कहते है “अरे, क्या तुम भी लड़कियों की तरह रोते हो…” और दूसरी ओर हम उम्मीद करते है कि वी हमारे दर्द को समझे।

सच है कि नारी के बिना पुरुष अधूरा है, लेकिन यह भी एक सच है कि पुरुष के बिना नारी का जीवन भी अधूरा ही रहेगा। वह एक मित्र, भाई, पिता जैसे अहम किरदार में पूरे परिवार को जीवंत बनाते है।

दुनिया भर में सोशल मीडिया पर यौन शोषण के खिलाफ चल रही मूहिम #meetoo में बहुत सारे पुरुषों ने उनके साथ हुए यौन उत्पीडन की घटनाओं के बारे में लिखा, कई बड़े सेलिब्रेटीज ने भी उनके साथ हुए हैरसमेंट के बारे में बताया। ख़ैर इन सब बातों से एक बात तो साबित होती है कि मर्द को भी दर्द होता है, वो भी अत्याचारों का शिकार होते है। हम हर साल 8 मार्च को महिला दिवस मनाते है, लेकिन क्या आप जानते है कि पुरुष दिवस कब मनाया जाता है?

19 नवंबर को हर साल पुरुष दिवस मनाया जाता है। भारत में पहली बार 2009 में कपड़े के एक इंटरनेशनल ब्रांड ने मेंस डे को प्रोमोट करते हुए मेंस वियर की कॉरपोरेट स्पॉन्सरशिप की पेशकश की। नवंबर, 2014 में पुरुषों के अधिकारों की रक्षा को लेकर कोलकाता में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किये गए।

पुरुषों के प्रति नजरिया बदलने कि कोशिश

इस बार इस दिवस का थीम है “Making a Difference for Men and Boys”. अर्थात, पुरुषों और लड़कों के लिए बदलाव लाना। इसका उद्देश्य पुरुषों और बच्चो के स्वास्थ्य, लैंगिक समानता और आदर्श पुरुषों के बारे में दुनिया को बताना है।

हाल ही में आयुष्मान खुराना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है जिसमें वो एक कविता गा रहे है। इस कविता के जरिए आयुष्मान बता रहे है कि “जेंटलमैन किसे कहते है”। इस वीडियो की जरिए आयुष्मान बता रहे है कि पुरुषों पर कितनी ज़िम्मेदारियां होती है।
पुरुष भी होते है भेदभाव का शिकार

राभा पश्चिम बंगाल तथा असम में रहने वाली एक जनजाति है. ये लोग जिस भाषा का प्रयोग करते हैं उसे भी ‘राभा’ ही कहा जाता है. यह जनजाति मातृसत्तात्मक है. यानी परिवार की मुखिया मां होती है, ना कि हमारे घरों की तरह पिता. बेटियों को ही मां की संपत्ति से हिस्सा मिलता है. और यहां शादी में विदा होकर बेटी नहीं जाती, बल्कि लड़के विदा होकर लड़की के घर रहने आते हैं. यानी घर जमाई की यहां परंपरा है. यह नियम प्रेम विवाह में भी लागू होता है. खास बात यह है कि घर जमाई के साथ यहां बिल्कुल ऐसा ही व्यवहार होता है जैसा कि हमारे यहां आम घरों में किसी बहु के साथ. घर जमाई को घर के काम करने के साथ-साथ सास और पत्नी के ताने भी सुनने को मिलते हैं. महिलाओं का कहना है कि चूंकि वे घर संभालती हैं इसलिए घर की मालिकन वे खुद हैं ना कि पुरुष.

पुरुष उत्पीड़न के खिलाफ SIF ऐप

सेव इंडिया फ़ैमिली फ़ाउंडेशन ने सिफ ऐप को तैयार किया है. फाउंडेशन का कहना है कि घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न के अधिकांश मामले झूठे होते हैं, अब कोर्ट ने भी इस तरह के मामलों की पहले सही से जांच के आदेश दिए हैं, ऐसे मामले को झेल रहे पुरुषों के लिए ये ऐप जारी किया गया है. खास बात यह है कि इस ऐप से लगातार लोग जुड़ रहे हैं.

महिला हेल्प लाइन में पुरुष ज्यादा

उत्तराखंड के रुद्रपुर जिले में महिला हेल्पलाइन नंबर पर शिकायद दर्ज कराने वालों में पुरुष ज्यादा हैं. इस हेल्प लाइन में साल भर में करीब एक हजार मामले आए, जिसमें से 546 मामले पुरुष उत्पीड़न के हैं. पारिवारिक न्यायालय में जहां तलाक के 158 मुकदमे विचाराधीन हैं, उसमें से 117 पुरुषों ने तलाक के लिए वाद दायर किया. 2015 में मानवाधिकार आयोग को महिला उत्पीड़न की 17,479 शिकायतें दर्ज हुई थीं, जिनमें उन्होंने 14,800 मामले निस्तारित किए. क्योंकि निरस्त मामलों में आरोप झूठे थे.

इन बातो को सुनने और जानने के बाद आपको यह तो समझ आ ही गया होगा कि पुरुषों के जीवन में रोजाना ढेरो चुनौतियां आती है, जिसे उन्हें केबीसी के पड़ाव की तरह बस पार करते जाना है। पुरुषों का हमारी उपलब्धियों में विशेष योगदान होता है। तो क्यों ना हम अपनी ज़िन्दगी में उनके महत्व को भी आंके उनके परेशानियों की भी समझे। उनके भावनाओ की भी कद्र करे।

Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *