शुद्ध और नेचुरल के नाम पर कहीं धोखा तो नहीं हो रहा?

  • सब कुछ ठीक रहा तो वह दिन दूर नहीं जब कोई भी फूड प्रोडक्ट यूं ही शुद्ध, नेचुरल और ट्रेडिशनल और ओरिजनल के नाम पर आपको नहीं चेपी जा सकेगा। स्वास्थ्य मंत्रालय जल्दी ही ऐसा प्रपोजल पेश करने जा रहा है जिसमें कोई भी फूड कंपनी अपने प्रोडक्ट को बेचने के लिए यूं ही नेचुरल्, शुद्ध, पारंपरिक व असली होने का दावा करने वाला ऐड नहीं दिखा सकेगी जब तक वह यह प्रूफ नहीं कर देते कि वह सच में उस लेवल को मेंटेन कर रहा है। फ्रेश होने का दवा तभी किया जा सकेगा जब उस फूड प्रोडक्ट में कोई भी और किसी भी तरह का प्रिर्जवेटिव यूज न किया गया हो। यही नहीं वह प्रोसेसड भी नहीं हो सकता। हालांकि प्रोडक्ट वॉशड, पील या चिल्ड हो सकता है। इसके अतिरिक्त इसमें कुछ भी और नहीं किया जाना चाहिए। तभी उसे फ्रेश की कैटेगरी में रखा जाएगा।
  • ये ड्राफ्ट फूड सेफ्टी एंड सिक्योरिटी अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से तैयार किया गया और इस प्रपोजल पर स्टॉक होल्डरों से भी सुझाव मांगे गए हैं। यही नहीं मंत्रालय ने अपने प्रपोजल में यह भी लिखा है कि नेचुरल शब्द का प्रयोग तभी होगा जब वह किसी प्लांट, पशु या माइक्रा ऑग्रनिज्म या मिनिरल से लिया गया हो। यह नहीं ये प्रोडक्ट भी तभी नेचुरल की श्रेणी में आएंगे जब इन्हें बिना केमिकल के भूना गया हो, बनाया गया हो या ब्लांच के साथ सुखाया या फ्रीज किया गया होगा। इनको स्ट्रेलाइज्ड या पॉश्चुरेशन भी प्राकृतिक तरीके से किया गया हो।
  • इन सब में किसी भी तरह का केमिकल यूज नहीं होना चाहिए। इन प्रोडक्ट में सारे ही इंग्रिडियंट्स प्राकृतिक ही होने चाहिए। नेचुरल गुडनेस, नेचुरिली बेटर या नेचुरल वे जैसे शब्द अब यूं ही कोई भी यूज नहीं कर सकेगा। ओरिजल जैसे शब्द भी तभी यूज करने होंगे जब वह वास्तविक रूप से ओरिजल तरीके से बनाए जाएंगे। यानी कोई भी पारंपरिक व्यंजन में उस परंपरा के अनुसार इंग्रिडियंट्स ही समान नहीं होने चाहिए बल्कि उसे बनाने कि विधि तक समान रखनी जरूरी होगी। कोई भी मुख्य इंग्रिडियंट्स की जगह कुछ और नहीं होना चाहिए।

यह भी पढ़ें:

औषधीय गुणों से भरपूर होता है काला नमक, जानिए इसके बड़े फायदे

जानिए, गुलाब जल के औषधीय गुणों के बारे में