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बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने जेपी नड्डा, जानिए उनके जीवन से जुड़ी ये खास बातें

देश की सबसे बड़ी और ताकतवर पार्टी की कमान अब जगत प्रकाश नड्डा को सौंप दी जाएगी । जेपी काफी लंबे समय से पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए है। वह प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के काफी नजदीक मानें जाते है। जेपी नड्डा ने बतौर कार्यकर्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को ज्वाइन किया था। एक समान्य कार्यकर्ता से लेकर देश की सबसे बड़ी पार्टी का राष्ट्रीय अघ्यक्ष बनने के पीछे नड्डा की काफी लंबी और संघर्ष भरी जिंदगी रही है। अपने लक्ष्य को पूरा करने और अपने  मिलनसार व्यक्तित्व के कारण ही आज जेेपी नड्डा ने पार्टी के कद्दावर नेताओं को पछाड़ कर पार्टी के अघ्यक्ष का पदभार सभांला है।

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जेपी का जन्म 2 दिसंबर 1960 को बिहार की राजधानी पटना में एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ । वैसे जेपी मूल रुप से हिमाचल प्रदेश के रहने वाले है। जेपी नड्डा ने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट जेवियर स्कूल पटना से की। स्नातक की पढ़ाई उन्होनें पटना कालेज से, उसके बाद उन्होंने कानून की पढ़ाई हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी शिमला से प्राप्त की। उनकी  शादी मलिका नड्डा से 1991 में हुई। जेपी नड्डा के दो बच्चे है। बताया जाता है कि जेेपी ने 16 साल की उम्र में ही जेपी आदोंलन में भाग लिया था। कालेज के दिनों से ही वह भाजपा की स्टूडेंट ईकाई विद्यार्थी परिषद से जुड गए थे। बाद में उन्हें उनकी पैतृक भूमि हिमाचल में विद्यार्थी परिषद का प्रचारक बनाकर भेजा गया । उनकी बढ़ती लोकप्रियता के कारण पहली बार विद्यार्थी परिषद ने हिमाचल विश्वविद्यालय में  एबीवीपी ने अपना इतिहासिक चुनाव जीता था। जिसके कारण जेपी के लोकप्रियता इतनी ज्यादा बढ़ गई थी कि वहां के हजारों  स्टूटेंड विद्यार्थी परिषद से जुड़ गए ।

स्टूटेंड में बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए जेपी को 1989 में राष्ट्रीय सगंठन मंत्री बनाया गया, और उसके बाद 1991 में वह भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष बनें। अपनी बढ़ती लोकप्रियता के कारण जेपी लगातार सगंठन और पार्टी के लिए निरंतर कार्य करते रहे। 1993 में  पार्टी ने उन्हे हिमाचल प्रदेश से विधानसभा चुनाव का  टिकट दे दिया। विधानसभा चुनाव में जेपी ने जीत हासिल की । हिमाचल प्रदेश में ही 1994 से लेकर 1998 तक जेपी राज्य विधानसभा में पार्टी के नेता रहे। 1998 में ही उन्हें स्वास्थ्य और संसदीय मामलों का मंत्री बनाया गया। 2007 में उन्होंने एक बार फिर जीत हासिल की। इस बार उन्हें वन पर्यावरण मंत्री बनाया गया।

पार्टी कार्यकर्ता के रुप में जेपी को केरल,महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश , तेलंगाना और कई राज्यो के  प्रभारी और चुनाव  प्रभिारी रहे थे। 2010 में बीजेपी का राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया। 2012 में उनके बढ़ते ग्राफ को देखकर उन्हें राज्यसभा का सदस्य बनाया गया था। उसके बाद उन्हें 2014 में उन्हें बीजेपी संसदीय समिति का सचिव नियुक्त किया गया।  2014 में कैबिनेट पुनर्गठन के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री बनाया।

जेपी को प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी और अमित शाह के काफी नजदीक माना जाता है। मोदी जब हिमाचल प्रदेश के प्रभारी होते थे उन दिनों में ही जेपी की मुलाकात नरेद्र मोदी से हुई थी। बताया जा रही है कि दोनो बीजेपी के गेस्ट हाउस में एकसाथ रहते थे। जब बीजेपी की 2014 में सरकार आई थी तो  उस समय उन्हें स्वास्थया मंत्री बनाया गया था।

बीजेपी में लगातार कार्य करने के कारण जेपी का पार्टी और संगठन में कद बढ़ता गया। उनकी पार्टी में बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए बीजेपी की निर्णय लेने वाली सस्थां ससंदीय समिति का सदस्य बनाया गया। वे बीजेपी की केद्रीय इलेक्शन कमेटी का सदस्य बनाया गया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में अमित शाह ने उन्हें यूपी की जिम्मेदारी दी थी। अपनी जिम्मेदारी को निभाते हुए उन्होंने बीजेपी को उत्तर प्रदेश में 50 फीसद से ज्यादा वोट दिलवाए थे और बीजेपी को लोकसभा चुनाव में यूपी से 64 सीटें जीती थी।

जब 2019 के लोकसभा चुनाव बीजेपी ने जीते तो जेपी ने शपथ नही ली थी। उस समय से ही कहा जा रहा था कि जेपी नड्डा ही भारतीय जनता पार्टी के नए अध्यक्ष होगें। जेपी के अघ्यक्ष बनते ही उनके ऊपर काफी बड़ी जिम्मेंदारी आ जाएगी। क्योंकि दिल्ली इलेक्शन के बाद पार्टी को बिहार, पश्चिम बगांल और असम का इलेक्शन लड़ना है। आज जगत प्रकाश रेड्डी देश की सबसे बड़ी और ताकतवर पार्टी के अध्यक्ष बनेगें। अब जेपी बीजेपी की ताकतवर तिकड़ी में शामिल हो चुके है।

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