झारखंड हाईकोर्ट ने महाराजगंज के पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह को विधायक हत्याकांड मे सुनाया फैसला

झारखंड हाईकोर्ट ने महाराजगंज के पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह और उनके भाई दीनानाथ सिंह और भतीजे रितेश सिंह तीनों को लगभग दो दशक पुराने मशरख विधायक अशोक सिंह हत्याकांड मामले में फैसला सुना दिया है। फैसले से बिहार के पूर्व बाहुबली सांसद प्रभुनाथ सिंह उनके भाई दीनानाथ सिंह और रीतेश सिंह को हाइकोर्ट से बड़ा झटका लगा है।

मशरख के तत्कालीन विधायक अशोक सिंह हत्याकांड में सजायाफ्ता तीनों दोषियों की अपील याचिका पर शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के उम्र कैद के फैसले को बरकरार रखा। हालांकि कोर्ट से प्रभुनाथ सिंह के भतीजे रितेश सिंह को राहत मिली है। अदालत ने भतीजे रितेश सिंह के खिलाफ निचली अदालत द्वारा दिये गए फैसले में संशोधन करते हुए उन्हे बरी कर दिया है।

गौरतलब है कि विधायक अशोक सिंह की हत्‍या तीन जुलाई 1995 को पटना के गर्दनीबाग थाना क्षेत्र में स्थित सरकारी आवास में बम मारकर कर दी गई थी। घटना के समय वे अपने आवास पर लोगों से मिल रहे थे। घटना को लेकर मृत विधायक की पत्नी चांदनी देवी ने पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह तथा उनके भाइयों दीनानाथ सिंह और रितेश सिंह के खिलाफ नामजद एफआइआर दर्ज कराई थी। जिसमे प्रभुनाथ सिंह के साथ उनके दो भाइयों के ऊपर भी मर्डर का आरोप लगाया था। इस हत्‍या के पीछे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की बात कही गई थी।

प्रभुनाथ सिंह के अधिवक्ता द्वारा अदालत में कहा गया कि इस मामले में निचली अदालत ने कई त्रुटियां की हैं। रितेश सिंह के खिलाफ कोई भी प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिला है। निचली अदालत ने सिर्फ परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर उन्हें दोषी करार दिया है। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद यह फैसला सुनाया है।

गौरतलब है कि प्रभुनाथ सिंह के रसूख को देखते हुए अशोक सिंह की पत्नी चांदनी देवी ने सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा अन्‍यत्र ट्रांसफर करने की अपील की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार लिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुकदमे को राज्‍य के बाहर झारखंड के हजारीबाग कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया था। हजारीबाग कोर्ट ने इस मामले में प्रभुनाथ सिंह व उनके दोनों भाइयों को दोषी मानते हुए मार्च 2017 में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही हजारीबाग कोर्ट ने इन सभी पर 40- 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था।

हजारीबाग जिला अदालत के इस फैसले के खिलाफ तीनों ने हाइकोर्ट में गुहार लगाते हुए वर्ष 2017 में अपील याचिका दायर की थी। अब तक बीस से ज्यादा तारीखों पर इस मामले में बहस हो चुकी है, जिसपर आज हाईकोर्ट द्वारा फैसला सुना दिया गया।