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CAA को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाला पहला राज्य बना केरल

नागरिकता कानून को लेकर अभी तक देश भर में लगातार प्रदर्शन हो रहे है। हांलाकि केन्द्र सरकार ने इस कानून को पूरे देश में लागू कर दिया है। परंतु अभी भी देश में कुछ राज्य ऐसे है।  जिन्होेंने सीएए को अपने राज्य में लागू नही करने की मांग उठाई है। केरल ने तो इस कानून के खिलाफ अपनी विधानसभा में एक प्रस्ताव भी पारित कर दिया है। केरल सरकार ने अब सीएए को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। और इस कानून के खिलाफ याचिका दायर कर दी है। इससे पहले भी 60 से ज्यादा याचिकाएँ इस कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

आपकी जानकारी के लिए बतां दे केरल देश का पहला ऐसा राज्य है। जिसनें सीएए को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सत्तारूढ़ सीपीएम के नेतृत्व वाले गठबंधन एलडीएफ और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन यूडीएफ ने विधानसभा में सीएए के विरोध में पेश प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि भाजपा के एकमात्र सदस्य ने इसका विरोध किया था।

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पी विजयन ने पहले ही यह घोषणा कर दी थी कि वह नागरिता सशोंधन कानून और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को केरल में नही लागू करेगे। केरल विधानसभा में 138 मतों से प्रस्ताव पास करवाकर उन्होंने केन्द्र सरकार पर दवाब डाला है। जब केरल सरकार ने इस प्रस्ताव को पारित किया था। तो केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा था।  कि लोगों को नागरिकता देने का अधिकार केवल संसद के पास है न कि विधानसभा के पास।

नागरिकता कानून को कोर्ट में चुनौती देने के लिए 60 याचिकाए है। जिनके ऊपर सुप्रीम कोर्ट 22 जनवरी को सुनवाई करेगा। यह याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में विभिन्न राजनितिक पार्टियों और देश की शश्सियतों ने की है।

 

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