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सम्पूर्ण सत्य न जानना ही बना खर-दूषण की मृत्यु का कारण

 

सूर्पनखा ने राम-लक्ष्मण को शादी का प्रस्ताव दिया तो दोनों के मना करने के बाद वह न वर्दास्त न कर सकी और सीता की ओर दौड़ी उसको भला-बुरा कहा । लक्ष्मण ने झपटकर तलवार से उसकी  नाक काट दी। यह जिधर से आई थी, उसी ओर चिल्लाती हुई भाग गई ।

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खर-दूषण वध इस प्रकार हुआ–वन के मध्य भाग में राक्षसों का एक बहुत बड़ा शिविर था । वहां राक्षसेन्द्र रावण के दो प्रतिनिधि–खर और दूषण–सेना सहित रहते थे । त्रिशिरा नामक महायोद्धा उनका सेनापति था ।

शूर्पणखा कटी नाक से राक्षसों की छावनी में पहुंची और रोकर कहने लगी । मैंने वन में एक रूपवती नारी सीता को देखा और उसे में अपने भाई रावण के लिए लाना चाहती थी लेकिन उन्होंने मेरी नाक काटकर मुझे खरी खोटी सुनाई और मेरे कुल और भ्राता रावण का बहुत अपमान किया |

खर बहन की दुर्दशा देखकर क्रोध से उन्मत्त हो गया । उसने राम को मारने के लिए तुरन्त सैनिकों का एक दल भेजा । शूर्पणखा भी साथ-साथ गई । राम ने राक्षसों को देखते ही तीक्ष्ण बाणों से मार गिराया । शूर्पणखा रोती-चिल्लाती फिर खर के पास पहुंची और उसे बारम्बार धिक्कारने लगी ।

राक्षसों की भयंकर सेना ने पंचवटी पर आक्रमण कर दिया । महारथी खर ने राम को बाणों से ढक दिया । उसके कवच, धनुष आदि टूट गए । राम ने तुरन्त बाण चढ़ाकर खर पर प्रहार किया । खर का वक्ष विदीर्ण हो गया । राम ने राक्षसों को मार डाला ।

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