जानिए प्रिमच्योर बर्थ के बारे में

हर साल 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु का सबसे बड़ा कारण ‘प्रिमच्योर बर्थ’ होता है। वे बच्चे जिनका जन्म गर्भावस्था के 37 सप्ताह से पहले हो जाता है, उन्हें ‘प्रिमच्योर बेबी’ की कैटिगरी में रखा जाता है। प्रिमच्योर बेबी बर्थ को रोकने की दिशा में उम्मीद की एक नई किरण जगी है। ऑस्ट्रेलिया में हुई एक रिसर्च में सामने आया है कि एक खास ड्रग की मदद से प्रिमच्योर बर्थ को रोका जा सकता है। रॉबिन्सन रिसर्च इंस्टीट्यूट की डायरेक्टर के अनुसार, इस ड्रग को कुछ ऐंटीबायोटिक्स के साथ देने पर यह बेबी इंफ्लामेट्री मकेनिज्म पर काम करता है।

तकरीबन 50 प्रतिशत केस में प्री-टर्म बर्थ की सबसे बड़ी बजह बैक्टीरियल इंफेक्शन होता है। फ़िज़िकल इंजरी स्ट्रेस की वजह से प्लसेंटल डैमेज होता है। ट्विन्स और ट्रिपलेट्स की कंडीशन में कई बार एयर पल्यूशन भी जिम्मेदार होता है। रिसर्चर्स ने इन सभी दिक्कतों को ‘इंफ्लॉमेट्री कैस्केड’ के तहत रखा है। जो गर्भवती महिला के इम्यून रेस्पॉन्स को एक्टिवेट कर प्रिमच्योर बर्थ की वजह बन जाता है। यह इंफ्लॉमेट्री कैस्केड इम्यून रेसेप्टर TLR4 (टॉल-लाइक रेसेप्टर 4) के उत्तेजित होने की वजह से होता है। TLR4 फ़िज़िकल इंजरी स्ट्रेस की वजह से उत्तेजित हो सकता है। जो प्रेग्नेसी के लिए बहुत हानिकारक होता है।