जानिए किस उम्र के बाद महिलाओं में बढ़ सकता हैं इन बीमारियो का खतरा

वर्तमान समय की इस भागदौड़-भरी लाइफ के कारण महिलाएं अपने लिए समय ही नहीं निकाल पाती है। मगर बढ़ती उम्र का असर सिर्फ चेहरे पर ही नहीं बल्कि सेहत पर भी पड़ता है। 40-45 की उम्र के बाद महिलाओं को कई गंभीर बीमारियों का खतरा हो सकता है। क्योंकि 40-45 साल की आयु के बाद उनके शरीर में मेनोपॉज के लक्षण नजर आने लगते हैं, जिसके कारण महिलाओं को कई गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए उम्र के इस पड़ाव पर महिलाओं को अपनी सेहत का खास ख्याल रखने की जरूरत होती है। आज हम आपको बताएंगे कि उम्र के इस पड़ाव पर महिलाओं को किन बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा होता है और आप किस तरह इससे बच सकती हैं।

1. हड्डियों का कमजोर होना
मेनोपॉज़ की शुरुआत से पहले कुछ महिलाओं को अनियमित पीरियड्स, ज्य़ादा ब्लीडिंग, यूटीआइ, हॉट फ्लैशेज़ और डिप्रेशन जैसी समस्या हो जाती है। इसके साथ ही पीरियड्स बंद होने के बाद महिलाओं के शरीर में प्रोजेस्टेरॉन और एस्ट्रोजेन हॉर्मोन का सिक्रीशन कम हो जाता है, जोकि हड्डियों के कवच की तरह काम करता है। इसकी कमी के कारण महिलाओं की हड्डियां कमजोर होने लग जाती है।

2. ब्रैस्ट कैंसर का खतरा
40-45 साल की आयु के बाद महिलाओं को ब्रैस्ट और एंडोमिट्रीयल कैंसर होने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए इस उम्र में ब्रेस्ट एग्ज़ैमिनेशन और पेप्सस्मीयर टेस्ट ज़रूर करवाएं। इसके अलावा इस समस्या से बचने के लिए नियमित एक्सरसाइज, हैल्दी डाइट को फॉलो करें और अपने बढ़ते वजन को कंट्रोल करें। अकेलेपन से बचें क्योंकि इस दौर में हॉर्मोन संबंधी असंतुलन की वजह से डिप्रैशन का खतरा भी बढ़ जाता है।

3. डायबिटीज
वैसे तो आजकल हर कोई डायबिटीज की समस्या से परेशान है लेकिन इस उम्र के बाद महिलाओं को टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा ज्यादा होता है। डायबिटीज होने पर पैंक्रियाज़ से इंसुलिन नामक ज़रूरी हॉर्मोन का सिक्रीशन कम हो जाता है। यह हॉर्मोन भोजन से मिलने वाले कार्बोहाड्रेट, शुगर और फैट को एनर्जी में बदलने का काम करता है। मगर इसकी कमी से ग्लूकोज़ का स्तर बढने लगता है और लंबे समय तक शरीर में रहने के बाद यह विषैला हो जाता है। इससे महिलाओं को किडनी, आंखों कमजोर होना, त्वचा की समस्याएं और हार्ट अटैक की संभावना बनी रहती है।