जानिए पीलिया का आसान इलाज !

यकृत विकार के कारण पीलिया रोग होता है यकृत में सूजन आ जाती है, यकृत की कोशिकाओं का शीघ्रता से क्षय होने लगता है। अधिक सम्भोग, खटाई व लाल मिर्च अधिक खाना, लवण का अधिक प्रयोग, शराब अधिक पीना, मिट्टी खाना, दिन में अधिक सोना, रक्त की कमी तथा वायरस के संक्रामण आदि कारणों से यह रोग हो जाता है।

क्या है इसके लक्षण

जी मिचलाना, हल्का बुखार, हृदय की धड़कन बढ़ना, नाड़ी की तीव्रता, कब्जी, जिहृ मैली, पोट व सिर में दर्द होता है। त्वचा, आखें व नाखून पीले पड़ जाना तथा भूख कम हो जाती है मल सफद आने लगता है। शरीर में दुर्बलता, बात-बात में चिड़चिड़ापन, जिगर का बढ़ना या बिगड़ना, खाया-पिया बाहर आने को होना आदि इस रोग के लक्षण हैं।

इसका आयुर्वेदिक उपचार

एक बताशा लीजिए, उस पर कच्चे पपीते का रस तकरीबन 10 बूँद डालिए, इससे 10-15 दिन खाने से पीलिया दूर होगा।

पीलिया रोग में नीम की पत्तियों का रस दो चम्मच की मात्रा लेकर उसमें उसी अनुपात में शहद मिलाकर प्रातःकाल सेवन करें।

जौ के सत्तू खाकर ऊपर से 200 से 500 ग्राम तक गन्ने का रस पीजिए। 5 दिन में पांडु रोग दूर होगा।

नीम के पत्तों के रस में सोंठ व शहद मिलाकर लेने से भी पीलिया में लाभ होता है।

बादाम 8 नग, बड़ी इलायची 5 नग व छुहारा 2 नग लेकर रात्रि को मिट्टी के बर्तन में भिगो दें। सुबह बादाम व इलायची के छिलके तथा छुहारे की गुठली लिकालकर अच्छी तरह से पीसकर 70 ग्राम मिश्री व 70 ग्राम मक्खन मिलाकर रोगी को दें तो 3-4 दिन में ही पीलिया रोग में आशानुकूल लाभ मिलता है। अनुभूत है।

मट्ठे में हल्दी चूर्ण मिलाकर दिन में दो बार सेवन करने से पीलिया में लाभ होता है।

गिरी बीज खीरा, गिरी बीज खरबूजा, कासनी, जड़ कासनी प्रत्येक 4 ग्राम, चीनी 20 ग्राम पानी में सम्मिलित करके रगड़कर प्रातः व सायं पिलायें, ग्रीष्म ऋतु में उत्तम चिकित्सा है।

अनन्नास के पक्व फल के 10 ग्राम रस में 2 ग्राम हल्दी चूर्ण तथा 3 ग्राम मिश्री मिलाकर कुछ दिन सेवन करने से पीलिया रोग में फायदा होता है।

यदि किसी को पीलिया हो गया हो तो पीपल के ताजे पत्तों को समान भाग लिसोड़े के पत्तों के साथ घोंट-छानकर नमक के साथ नित्य प्रति लेने से शीघ्र लाभ होता है। पत्तें 2 से 4 तक की संख्या में लें।

आँवले का चूर्ण छाछ के साथ सेवन करने से पीलिया में लाभ होता है।

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