जानिए रक्तदान करने से होने वाले फायदे

समाज के कई लोग बराबर रक्तदान कर रहे हैं, ताकि थैलेसीमिया से पीड़ित लोगों को आसानी से बचाया जा सके। अपना ब्लड देकर इस बीमारी से जूझ रहे लोगों को नई जिंदगी देने वाले लोगों के जज्बे को सलाम।

थैलेसीमिया एक प्रकार का जेनेटिक डिसऑर्डर होता है। इस रोग में शरीर की हीमोग्लोबिन निर्माण की प्रक्रिया में बहुत गड़बड़ी हो जाती है, जिसके चलते खून की कमी हो जाती है। इसके मरीजों के शरीर में रेड ब्लड सेल्स औसतन 120 दिन की जगह 20 दिन के ही रह जाते हैं। इसका सीधा प्रभाव शरीर के हीमोग्लोबिन पर पड़ता है।

हीमोग्लोबिन कम होने से कमजोरी और दूसरी बीमारियों होने की आशंका ज्यादा हो जाती है। इस बीमार का सही समय पर इलाज न मिलने पर मौत तक हो सकती है। आमतौर पर इस बीमारी लक्षण बच्चो में जन्म के 4 या 6 महीने में ही नजर आने लगते हैं।

बच्चे की त्वचा और नाखूनों में पीलापन आने लगता है। आंखें और जीभ भी पीली पड़ने लगती हैं। आंतों में संक्रमण होने लगता है और दांत निकलने में दिक्कत होती है।

केजीएमयू के मेडिसिन विभाग के डॉ. ने बताया, थैलेसीमिया दो प्रकार के होते हैं। माइनर थैलेसीमिया में केवल एक जींस प्रभावित होता है। इसमें मरीज को कम ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत होती है। इसके अलावा जब दोनों जींस खराब होते तब मेजर थैलेसीमिया होता है। इसमें हर महीने ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत होती है।