जानिए टांसिल का इलाज !

गले के प्रवेश द्वार के दोनों तरफ लसिका ग्रन्थि जैसी एक-एक माँस की गाँठ होती है। टाँसिल के बढ़ने का कारण निशास्ते का अधिक प्रयोग। मैदा, चावल, आलू, चीनी, अधिक ठण्डा, अधिक खट्टा आदि का जरूरत से ज्यादा खाना, इन चीजों से अम्ल पैदा होता है तथा कब्ज रहने लगता है। टाँसिल बढ़ने का मुख्य कारण सर्दी लगना भी है। ऋतु परिवर्तन, रक्त की अधिकता, डिफ्थीरिया, आतशक, बाय का बुखार, गन्दी वायु और अशुद्ध दूध पीना आदि कारणों से भी यह बीमारी हुआ करती है।

इसके लक्षण

इस रोग में गले के काग में सूजन आ जाती है, जिसके कारण गले में पीड़ा, दुर्गन्धित श्वास, जीभ पर मैल चढ़ जाना, सिर दर्द, गर्दन के दोनों ओर की लसिका ग्रन्थियों की वृद्धि तथा उनको दबाने से दर्द, साँस लेने में कष्ट, शरीर में दर्द, स्वरभंग, बेचैनी, सुस्ती आदि लक्षण प्रकट होते हैं। रोग के प्रारम्भ में ठण्ड लगकर ज्वर आना, गले में दर्द, थूक निगलने में कष्ट। यह बीमारी प्रायः दुर्बल व्यक्तियों को होती है।

इसका आयुर्वेदिक घरेलू उपचार

यदि गले में दर्द हो तो भी अजवायन के पानी के कुल्ले करें।

टाँसिल्ज तथा घेंघा में गाजर का रस प्रतिदिन छोटा गिलास लगातार दोपहर के समय दो-तीन मास पीने से आशातीत लाभ होता है।

रात को सोते समय यह प्रयोग करना चाहिए। पिसी हल्दी और पिसी काली मिर्च आधा-आधा चम्मच, अदरक का ताजा निकाला हुआ रस 1 चम्मच-तीनों को मिलाकर आग पर गरम करें और 1 चम्मच शुद्ध घी डालकर मिला लें। इसे थोड़ा ठण्डा करके चम्मच से लेकर चाट लें व ऊपर से गरम दूध पी लें। इसके बाद कुल्ला करके मुँह साफ कर लें पर पानी न पिएँ। इस प्रयोग से 2-3 दिन में ही लाभ हो जाता है।

गर्म पानी में ग्लिसरीन मिलाकर गरारे करने से टाँसिलाइटिस में लाभ होता है।

फिटकरी के चूर्ण की ग्लिसरीन के साथ रूई की फुरेरी से गले की तकलीफें दूर होती हैं।

टाँसिल के कारण गले की तकलीफ के लिए नमक के गर्म पानी का गरारा (गार्गिल) बहुत ही लाभदायक है।

फिटकरी कच्ची, हल्दी, मुलहठी और सोहागा फूला-चारों पिसे हुए बराबर-बराबर मात्रा में मिलाकर शीशी में रख लें। इस मिश्रण का आधा चम्मच एक गिलास सहते-सहते गरम पानी में डालकर घोल लें और गरारे करें।

गले में दर्द हो तो चाय बनाते समय उसमें कुछ तुलसी की मंजरियाँ और अदरक डाल दें, इस चाय को पीने से गले को राहत मिलती है।

गले में तुलसी की माला पहनने से टाँसिल व गले के रोग नहीं होते हैं।

पहले तो गर्म पानी में फिटकरी घोल कर गरारे करें फिर शहतूत का रस पीयें, टाँसिल सामान्य अवस्था में आ जायेंगे।

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