जानिए मोच-खिंचाव में क्या हैं अंतर और कारण

सामान्यतः जल्दबाजी में काम करने से हमारी बॉडी में पैन होना तो बहुत नार्मल बात हैं, परंतु देखा जाए तो इसके साथ ही हमारे बॉडी में मोच या फिर खिंचाव भी होता रहता हैं, लेकिन कभी-कभी हम मोच को खिंचाव या फिर खिंचाव को ही मोच समझ लेते हैं जिसके कारण हम गलत एक्ससाइज या फिर दवा लेना भी शुरू कर देते हैं, आज हम आपको मोच और खिंचाव में अंतर बताने जा रहे हैं कि कैसे पता करें कि ये मोच हैं या खिंचाव आइए जानें-

मोच और खिंचाव दोनों तभी होते हैं जब मांसपेशियों और लिगामेंट्स में बुरी तरह चोट लग जाए। एक जैसे दिखने वाले इन चोटों को आप एक नहीं कह सकते हैं। इस लेख में इन दोनों के बीच के अंतर के बारे में हम आपको आसानी से बता रहे हैं।

हमारे जोड़ों खासकर हाथ या पैर में जब भी खिंचाव होता हैं तब हम यही कहते हैं मोच आ गई। मोच तब आती हैं जब लिगामेंट यानी स्नायु का खिंचाव होता है या फिर यह बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाती है। लिगामेंट शरीर के जॉइंट या हड्डियों के जोड़ों के ऊतकों को कहते हैं आपकी जानकारी के लिए हम बता दें कि मोच अक्सर कलाई, अंगूठा, घुटना और टखने में आती है।

किसी मांसपेशी में खिंचाव के कारण होती है। यह तंतु यानी टेंडन में चोट के कारण भी होती है। तंतु ऊतकों की बनी रेशेदार धागेनुमा रचना है जो मांसपेशियों को को हड्डी से जोड़ती है। स्ट्रेन की जगह मोच की जगह से अलग होती है और इसके नाम भी अलग हैं। हेम्स्ट्रिंग में खिंचाव होना, यह वे मांसपेशियां हैं जो पैरों के पिछले हिस्से में होती हैं और कूल्हे और घुटने से जुड़ी होती हैं। गेस्ट्रोक्नीमियस और सोलस में खिंचाव, ये घुटने से एड़ी तक जुड़ी मांसपेशियां हैं। क्वाड्रिसेप्स में खिंचाव, ये मांसपेशियां जांघ के सामने होती हैं। लुंबर में खिंचाव, ये मांसपेशियां कमर में पाई जाती हैं।

मोच या खिंचाव दोनों बहुत ही ज्यादा दर्दनाक स्थिति हैं। इन दोनों में ठीक होने की अवधि भी अलग-अलग है। मोच अगर है तो वह कुछ दिन या दो से तीन सप्ताह में विल्कुल ठीक हो सकता है। जबकि खिंचाव का उपचार अधिक दिनों तक चलता है। खिंचाव को ठीक होने में दो सप्ताह से लेकर छह महीने तक का लम्बा समय लग सकता है। हालांकि यह समस्या किसी को भी हो सकती है लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जिनको मोच और खिंचाव होने की संभावना बहुत अधिक रहती है। एथलीट, डांसर, शारीरिक रूप से अधिक सक्रिय लोगों को इस प्रकार की चोटें अधिक लगती हैं। मोटापा और कमजोर मांसपेशियों के कारण मोच और खिंचाव का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है। इस तरह की समस्या होने पर अधिक से अधिक आराम करें।