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जानें, क्या है भीमा-कोरेगांव की घटना,जिसकी जांच अब NIA करेगीं

केंद्र सरकार ने भीमा-कोरेगांव के दगों की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी(एनआईए) को सौंप दी है। केस एनआईए को दिए जाने पर महाराष्ट्र सरकार ने इसका विरोध किया है, राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि हमें बिना पूछे ही केन्द्र सरकार ने भीमा-कोरेगांव दगों का केस एनआईए को दे दिया है।

दूसरी तरफ महाराष्ट्र के पूर्व सीएम और भाजपा नेता देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि यह माला पूरे देश में फैला हुआ है। यह केवल महाराष्ट्र तक ही सीमित नही है। केन्द्र सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार ने यह फेैसला सही लिया है क्योंकि अर्बन नक्सल पूरे देश में फैला हुआ है। इससे नक्सली के चेहरे बेनकाब होगें। जो देश को तोड़ने का काम कर रहे है।

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इस मामलें की जांच न्यायमूर्ति जय नारायण पटेल वाला आयोग कर रहा है। कुछ दिन पहले ही मिलिंद एकबोटे को आयोग के समक्ष पेश किया गया था, लेकिन उन्होंने गवाही देने से मना कर दिया था। आपकी जानकारी के लिए बतां दे कि भीमा-कोरेगांव में 1 जनवरी 2018 को जातिगत हिंसा हुई थी। जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी।

एकबोटे के आवेदन के बाद उन्हे आयोग ने गवाह के रुप में मुक्त कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि उनके ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने और उनके राष्ट्रवादी विचारों के कारण निशाना बनाया गया था। आयोग के वकील सतपुते ने कहा कि एकबोटे का आवेदन पढ़ने के बाद आयोग ने उन्हें गवाह के रुप मुक्त कर दिया था।

भीमा-कोरेगांव की बात करें तो 1818 में ब्रिटिश और पेशवाओं के बीच पुणे के भीमा-कोरेगांव में युद्ध हुआ था। ब्रिटिश सेना में महार जाति के लोग शामिल थे। इन्ही लोगों के बल पर ब्रिटिश सेना ने पेशवाओं को हरा दिया था। महार जाति के लोग इस जीत को अपना स्वाभिमान मानते है, और अपना जश्न मनाते है। जब इसकी 200वी वर्षगांठ बनाने के लिए हजारों की सख्यां में लोग जहां एकत्रित हुए थे। अचानक विजय स्तंभ के पास की सीढीयों पर किसी ने हमला कर दिया था जिसके बाद काफी ज्याद हिंसा भड़क उठी। इसके बाद दलित समुदाय के लोगों ने अहमदाबाद, औरंगाबाद, नासिक, पुणे को बंद कर दिया। जिसके बाद वहा आगजनी और सरकारी सम्पति को नुक्सान पहुचायां गया था।

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