जानिए क्यों शिशुओं के बीच ना करें टचस्क्रीन डिवाइस का प्रयोग ?

आजकल है ये बहुत ही सामान्य बात है कि आपके आसपास मौजूद बच्चों के हाथ में tablet और स्मार्टफोन आसानी से मिल जाएंगे। जिन पर वह दिन भर अपना समय व्यतित करते हैं आपके आस पास मौजूद वातावरण आपको विचलित करता है या नहीं । माता पिता भी खुद सुकून महसूस कर लेते हैं कि उनके बच्चें व्यस्त हैं और यही उनकी सबसे बड़ी गलती है।

बच्चों द्वारा घंटों स्क्रीन के सामने समय गुजराने से नींद की समस्या बरकरार है, अब पोर्टबल टच सक्रीन के लिए लिंक बड़ रहा है और निरंतर शिशु नींद में कमी आ रही है। एक ऑनलाइन सर्वेक्षण द्वारा द्वारा अध्ययन कर्ताओं ने मीडिया उपयोग के बारे में माता पित से कुल 715 प्रतिक्रिया एकत्रित की जिसमें टीवी और टच स्क्रीन ़डिवाइस शामिल है। लेकिन बात ये भी है कि रात में जागने और मीडिया के उपोयग के बीच कोई लिंक नहीं है । और काफी हद तक यह पाया गया है कि मीडिया उपोयग से हर घंटे कुल नींंद 15.6 मिनट की कमी से जुड़ा है । इसलिए जो बच्चे मीडिया उपोयग से संबंध में रहते हैं वे सोने में लम्बा वक्त लेते हैं।

यह बात ध्यान देने योग्य है कि अध्ययन के परिणाम शिशुओं के माता पिता से इकट्टे किए गए हैं। जो 6 माह से 36 माह की उम्र के बीच हैं। इस तरह की प्रोद्योगिकी बच्चों के लिए बहुत ही प्रारंभिक चरण है, और एक हद तक बच्चों के मजबूत विकास के लिए नींद की आवश्कता होती है।

शोधकर्ताओं ने वास्तव में टचस्क्रीन उपयोग और शिशुओं के लिए कम नींद के बी एक रिश्त स्थापित किया है। इस तरह यह माना जा सकता है की तकनीक बेहद उपयोग किया जाना कहीं न कहीं घातक भी हो सकता है और काफी हद तक नींद में कमी आने का यह एक कारण बनकर सामने रह जाएगा।

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