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मंदिर जहां मृत भी होते हैं जिंदा

जौनसार बावर में यमुना नदी के तट पर स्थित लाखामंडल मंदिर ना सिर्फ ऐतिहासिक बल्कि पौराणिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है। यह मंदिर भगवान शिव और पार्वती को समर्पित है। लाखामंडल मंदिर नागर  शैली से बना है। यहाँ मिलने वाले अवशेषों से प्रतीत होता है कि यहाँ बहुत मंदिर रहे होंगे क्योंकि आज भी खुदाई करने पर मूर्ति और शिवलिंग मिलते रहते है। मंदिर में स्थित प्राचीन मूर्तियां और दर्जनों शिवलिंग पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते है। मंदिर के अंदर चट्टान में पार्वती के पैर के निशान भी दिखाई देते है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने लाखामंडल को ऐतिहासिक धरोहर घोषित करके मंदिर के संरक्षण की जिम्मेदारी ली है।

इतिहास :

माना जाता है कि कौरवों ने पांडवों को जिंदा जलाने के लिए लाक्षागृह बनाया था। जिससे पांडव जिंदा बच कर निकल गए और फिर युधिष्ठिर ने इस मंदिर में शिवलिंग की स्थापना की थी, जो आज भी यहाँ है।  शिवलिंग के सामने बरामदे में दो द्वारपालों की मूर्ति है, जिनमें से एक का हाथ कटा हुआ है।

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लाखामंडल से कुछ दूरी पर एक गुफा है। कहा जाता है जब दुर्योधन, पाण्डवों को ढूंढ रहा था तो उन्होंने इस गुफा में शरण ली थी। मंदिर से मिले शिलालेख में लिखा है कि राजकुमारी ईश्वरा ने अपने पति की के निधन के बाद उनको सद्गति देने के लिए इस मंदिर का निर्माण करवाया गया था।

मान्यता :

यहाँ स्थित शिवलिंग पर जल चढ़ाने पर अपना प्रतिबिंब दिखाई देता है। माना जाता है कि जो इसमें अपना प्रतिबिंब देख लेता है तो मरणोपरांत उसे स्वर्ग प्राप्त होता है। लाखामंडल के शिवलिंग के सामने द्वारपाल के सम्मुख यदि मृत व्यक्ति को रख दिया जाए तो पुजारी द्वारा पवित्र जल छिड़कने पर मृत व्यक्ति थोड़ी देर के लिए जिंदा हो जाता है और गंगाजल पीकर मृत हो जाता है।

मान्यता है कि जिन लोगों की पुत्र की इच्छा होती है, यदि वह लोग यहाँ शिवरात्रि में पूरी रात मुख्य द्वार के सामने बैठकर ज्योति को देखते है तो उन्हें 1 साल के अंदर पुत्र प्राप्त हो जाता है।

 शिवलिंग :

लाखामंडल मंदिर में दो शिवलिंग अलग-अलग रंगों और आकार के है। पहला गहरा हरा शिवलिंग द्वापर युग से संबंधित है, और दूसरा लाल शिवलिंग त्रेता युग से संबंधित है

अवशेष :

 भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को साल 2006 में मंदिर के पास टूटी हुई दीवार की खुदाई के दौरान भगवान विष्णु की एक मूर्ति और तीन शिवलिंग प्राप्त i हुए जो विभाग के संग्रहालय में सुरक्षित है।
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