लाल बहादुर शास्त्री जी की पुण्यतिथि (11 जनवरी): अगर दिल का दौरा पड़ा था तो उनका शरीर नीला क्यों पड़ गया था?

कुछ मौतें ऐसी होती है, जो हमेशा रहस्य बनी रहती है. लाल बहादुर शास्त्री की ताशकंद में मौत ऐसा ही एक रहस्य है जो आज भी रहस्य ही बना हुआ है. लाल बहादुर शास्त्री के पुत्र एवं कांग्रेस नेता अनिल शास्त्री ने कहा था कि ‘मेरी मां (ललिता) को शुरू से ही संदेह था कि उनका (शास्त्री जी का) निधन स्वाभाविक नहीं है.

आरटीआई कार्यकर्ता रोहित चौधरी द्वारा लगाई गई आरटीआई के जवाब में शास्त्री के मेडिकल रिपोर्ट से चौकाने वाली बातें सामने आई हैं. आरटीआई के जवाब में बताया गया -10 जनवरी 1966 की रात 12.30 बजे तक बिलकुल ठीक थे. इसके बाद अचानक उनकी तबियत खराब हुई, जिसके बाद वहां मौजूद लोगों ने डॉक्टर को बुलाया. रात 1.32 बजे शास्त्री की मौत हो गई.

गौरतलब है कि – अप्रैल 1965 से 23 सितंबर 1965 तक लगभग 6 महीने तक युद्ध चला था. युद्ध खत्म होने के 4 महीने बाद जनवरी, 1966 में दोनों देशों के शीर्ष नेता तत्कालीन सोवियत संघ में आने वाले ताशकंद में शांति समझौते के लिए रवाना हुए. पाकिस्तान की ओर से राष्ट्रपति अयूब खान वहां गए थे.

10 जनवरी को दोनों देशों के बीच शांति समझौता भी हो गया. लेकिन समझौते के 12 घंटे में उनकी अचानक रहस्यमयी मौत हो गई. कहा जाता है कि समझौते के बाद कई लोगों ने शास्त्री को अपने कमरे में परेशान हालत में टहलते देखा था. कुछ लोग यह भी कहते हैं कि समझौते से वह बहुत खुश नहीं थे. ऐसा लगता था जैसे दबाब में समझौता किया है

शास्त्री के साथ ताशकंद गए उनके सूचना अधिकारी कुलदीप नैय्यर ने अपनी किताब में ‘बियोंड द लाइन’ में लिखा है, “मैं सो रहा था, अचानक एक रूसी महिला ने दरवाजा खटखटाया. उसने बताया कि आपके प्रधानमंत्री की सेहत ठीक नहीं है. मैं जल्दी से उनके कमरे में पहुंचा. रूसी प्रधानमंत्री एलेक्सी कोस्गेन ने इशारे से बताया कि शास्त्री नहीं रहे.

कुछ लोग दावा करते हैं कि- जिस रात शास्त्रीजी की मौत हुई, उस रात खाना उनके निजी सहायक रामनाथ ने नहीं, बल्कि सोवियत रूस में भारतीय राजदूत टीएन कौल के कुक “जान मोहम्मद” ने पकाया था. उनकी मौत के बाद शरीर के नीला पड़ने पर लोगों ने आशंका जताई थी कि शायद उनके खाने में जहर मिला दिया गया था. शास्त्रीजी के पार्थिव शरीर को भारत भेजा गया. शव देखने के बाद उनकी पत्नी ललिता शास्त्री ने दावा कि उनकी मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है.

अगर दिल का दौरा पड़ा था तो उनका शरीर नीला क्यों पड़ गया था और सफेद चकत्ते कैसे पड़ गए. उनकी पोस्टमार्टम की मांग के शास्त्री के के शव का पोस्टमार्टम भी नहीं कराया गया, अगर उस समय पोस्टमार्टम कराया जाता तो उनके निधन का असली कारण पता चल जाता. एक पीएम के अचानक निधन के बाद भी उनके शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया जाना भी इस संदेह की ओर इशारा करता है कि साजिश के तार भारत से भी भी जुड़े हो सकते हैं. सारा देश शास्त्री जी की मौत से स्तब्ध था और जांच की मांग कर रहा था.

लेकिन तत्कालीन इंदिरा सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया. 2 अक्टूबर, 1970 को शास्त्री जी के जन्मदिन पर उनकी पत्नी ललिता शास्त्री उनके निधन की जांच कराने की मांग की जिसका समर्थन विपक्ष के नेताओं ने भी किया. तब इंदिरा गांधी उनकी मौत की जांच के लिए मजबूर हो गई. उन्होंने एक जांच कमेटी गठित की. जांच कमेटी बड़ी तेजी से अपनी जांच कर रही थी कि अचानक शास्त्री जी के निजी डॉक्टर आरएन सिंह और निजी सहायक रामनाथ की भी अलग-अलग हादसों में रहस्यमयी मौत हो गई. ये दोनों लोग शास्त्री के साथ ताशकंद के दौरे पर गए थे. उस समय माना गया था कि इन दोनों की हादसों में मौत से केस बेहद कमजोर हो गया. कुछ ही समय बाद शास्त्रे जी के निजी चिकित्सक रहे डॉ. चुग के पूरे परिवार की दिल्ली के रिंग रोड में सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है.

उसके बाद जांच में सहयोग करने वाले शास्त्रीजी के संयुक्त सचिव रहे सी.पी. श्रीवास्तव अचानक भारत छोड़कर विदेश चले गए. कहा जाता है कि सी.पी. श्रीवास्तव को भी जान का ख़तरा लगता था.

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