लसोड़ा मसूड़े, गले की समस्याओं को दूर करता है, जानिए इसके फायदे

आमतौर पर कहा जाता है कि आयुर्वेद में जितना दम होता है उतना ऐलोपैथिक में कहां? कहना सही भी है, यदि हम भारतीय इस प्राकृतिक उपहार की ताकत को पहचान लें तो हर रोग को मिटाने का विकल्प आसानी से खोजा जा सकता है। लेकिन तब, जब यकीन हो।

लसोड़ा का उपयोग

आपको अक्सर गले की खराश, गले में दर्द, मसूड़ों में जलन, अगर आपको ऐसी दिक्कतों का बार-बार सामना करना पड़ रहा है, तो इस पेड़ की छाल, बीज़ों, पत्तों आदि के कई फायदे हो सकते हैं। लसोड़ा में पान की तरह ही स्वाद होता है। इसके पेड़ की तीन से चार जातियां होती है पर मुख्य दो हैं जिन्हें लमेड़ा और लसोड़ा कहते हैं। इसके फल सुपारी के बराबर होते हैं। कच्चा लसोड़ा का साग और आचार भी बनाया जाता है।

लसोड़े के फायदे

अतिसार

लसोड़ा की छाल को पानी में घिस लें। बचे हुए रस को अतिसार से पीड़ित व्यक्ति को पिलाएं, तो आराम मिलेगा।

गले की समस्याएं

छाल के रस को अधिक मात्रा में लेकर इसे उबाला जाए और काढ़ा बनाकर पिया जाए तो गले की तमाम समस्याएं खत्म हो जाती है।

दाद-खाज, खुजली

इसके बीजों को पीसकर दाद-खाज और खुजली वाले अंगो पर लगाएं आराम मिलता है।

शरीर में स्फूर्ती

गुजरात के आदिवासी लसोड़ा के फलों को सुखाकर चूर्ण बनाते है और मैदा, बेसन और घी के साथ मिलाकर लड्डू बनाते हैं। इनका मानना है कि इस लड्डू के सेवन शरीर को ताकत और स्फूर्ती मिलती है।

सूजन में राहत

छाल का काढ़ा और कपूर का मिश्रण तैयार कर सूजन वाले हिस्सों में मालिश की जाए तो फायदा होता है।

महावारी

लसोड़ा की छाल का काढ़ा तैयार कर माहवारी की समस्याओं से परेशान महिला को दें।आराम मिलता है।

मसूड़ो की सूजन, दांत दर्द

इसकी छाल की लगभग 200 ग्राम मात्रा लें। उसे पानी के साथ मिलाएं और उबालें। जब एक चौथाई शेष रहे तो इससे कुल्ला करें। इससे मसूड़ों की सूजन, दांतो का दर्द और मुंह के छालों में आराम मिल जाता है।

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