जानें यह घरेलू इलाज अगर आप भी हैं नाक के रोगों से परेशान !

नाक में बहुत रोग हो जाते हैं नाक के बीच की श्लैष्मिक झिल्ली में घाव व उसमें बदबूदार स्त्राव निकलता है तथा कभी-कभी नाक की हड्डी में भी घाव हो जाता है इसे पीनस रोग कहते हैं। सर्दी लग जाने या जुकाम हो जाने पर नाक से पानी बहने लगता है, गाढ़ा बलगम भी आने लगता है। नाक खुरचने, नाक में कोई वस्तु चली जाने अथवा नकसीर आने पर नाक से खून बहने लगता है। नाक में घुसी बस्तु न निकलने पर नाक सड़ने लगती है। नाक साफ न रहने से श्वास में दुर्गन्ध आने लगती है तथा श्वास लेने में कठिनाई होने लगती है। नाक में कई बार फुन्सी भी हो जाती है जिसका सावधानीपूर्वक उपचार कराना चाहिये। इसके अगर लक्षण की बात की जाए तो नाक के रोगों में सूँघने की शक्ति कम या गायब हो जाती है।

इसके लिए अपनाएं यह घरेलू इलाज

नाक में फुँसी हो तो छोटी इलायची का चूर्ण पीसकर लगाने पर, वह पकने-फूटने से पहले ही सूख जायेगी।

नाक में फुँसी हो जाये तो बरगद का दूध, फुरेरी बनाकर उसमें दूध लगाकर फुँसी पर लगायें। पहिले कुछ पीड़ा, जलन होगी फिर फुँसी सूख कर ठीक हो जायेगी।

नाक के अन्दर, बाहर फुन्सियाँ निकलने पर बेर सूँघने और उसका गूदा लगाना चाहिये।

नाक और गले के रोग होने पर गाजर और पालक का रस प्रत्येक 250 ग्राम मिलाकर पीने से लाभ होता है।

नाक के दर्द, पीनस, घाव, फुन्सी हो तो तुलसी के सूखे या गीले पत्तों को मसल कर सूँघने से लाभ होता है।

नाक में खुश्की तथा नथुनों पर पपड़ी जमने पर घी सूँघें और रूमाल पानी में भिगोकर सिर पर रखने से लाभ होता है।

तुलसी के पत्तों का रस या पिसे हुए सूखे पत्ते सूँघने से नाक की दुर्गन्ध दूर होती है और कीड़े मर जाते हैं।

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