ब्रह्मा जी के विवाह को लेकर फैलाया जाता है झूठ: इस पोस्ट को पढ़कर सारे संशयो को दूर कीजिए

ब्रह्मा यानी सृष्टि की रचनाकार, और ब्रह्म ज्ञान यानी सृष्टि ज्ञान के ज्ञाता। सभी वेद श्रुति हैं। इसीलिए उन्हें रुपक के माध्यम से व्याख्यायित किया गया है। ब्रह्म यानी सृष्टि के मूल से ज्ञान धाराएं निकली हैं। यानी उनका जन्म हुआ है।

यहां यह जानना जरूरी है कि वैदिक काल में राजा को प्रजापति कहा जाता था। सभा और समिति को प्रजापति की दुहिता यानि बेटियों जैसा माना जाता था। ब्रह्मा को प्रजापति भी कहा जाता है इस कारण भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई। ब्रह्मा की बेटी सरस्वती श्वेत रंग की थीं, लाल रंग की नहीं।

सावित्री, गायत्री, श्रद्धा, मेधा और सरस्वती की 5 धाराएं ब्रह्म में मिल जाती हैं, जो ब्रह्म यानी ईश्वर (परम ज्ञान) में मिलने का मार्ग हैं। इसलिए पत्नी कही गई हैं। पत्नी का अर्थ बहुत सारगर्भित है। यहां भाषा विज्ञान की समझ होनी आवश्यक है।
जिन्हें इसका ज्ञान नहीं या जानबूझकर सनातन ज्ञान को, आराध्य देवों को बदनाम करने के लिए या अनजाने में इन चार श्लोकों का गलत अर्थ मध्यकाल से ही निकाला जाता रहा है:-
इस श्लोक को पढ़ें और ठीक से समझें –
वाचं दुहितरं तन्वीं स्वयंभूर्हतीं मन:।
अकामां चकमे क्षत्त्: सकाम् इति न: श्रुतम् ॥(श्रीमदभागवत् 3/12/28)
प्रजापतिवै स्वां दुहितरमभ्यधावत्
दिवमित्यन्य आहुरुषसमितन्ये
तां रिश्यो भूत्वा रोहितं भूतामभ्यैत्
तं देवा अपश्यन्
“अकृतं वै प्रजापतिः करोति” इति
ते तमैच्छन् य एनमारिष्यति
तेषां या घोरतमास्तन्व् आस्ता एकधा समभरन्
ताः संभृता एष् देवोभवत्
तं देवा अबृवन्
अयं वै प्रजापतिः अकृतं अकः
इमं विध्य इति स् तथेत्यब्रवीत्
तं अभ्यायत्य् अविध्यत्
स विद्ध् ऊर्ध्व् उदप्रपतत् ( एतरेय् ब्राहम्ण् 3/333)
इस श्लोक में कहा गया है कि प्रजापति दौड़ा लाल रंग की लड़की की तरफ। लेकिन ब्रह्मा की बेटी सरस्वती तो धवल यानि सफेद हैं। फिर कौन है ये लाल लड़की। उषा लाल हो सकती है। उषा मतलब उगते हुए सूरज के वक्त आसमान में जो लाली होती है। लेकिन वो ब्रह्मा की बेटी ही नहीं है।

#अथर्ववेद का श्लोक:-

सभा च मा समितिश्चावतां प्रजापतेर्दुहितौ संविदाने।
येना संगच्छा उप मा स शिक्षात् चारु वदानि पितर: संगतेषु।

ऋगवेद का श्लोक :-

पिता यस्त्वां दुहितरमधिष्केन् क्ष्मया रेतः संजग्मानो निषिंचन् ।
स्वाध्योऽजनयन् ब्रह्म देवा वास्तोष्पतिं व्रतपां निरतक्षन् ॥ (ऋगवेद -10/61/7)

इसका अर्थ ये है कि राजा यानि प्रजापति ने अपनी बेटी यानि प्रजा पर हमला कर दिया। प्रजा ने छेड़ दी क्रांति। राजा की हार हो गई। फिर बड़े बुजुर्गों ने उस राजा को खर्चा पानी देकर बैठा दिया और दूसरा राजा चुना। सीधा सा अर्थ ये कि राजा ने प्रजा से जबरदस्ती की। उसकी उसे सजा मिली। प्रजापति दो हैं, एक ब्रह्मा और एक राजा।

यहां यह जानना जरूरी है कि वैदिक काल में राजा को प्रजापति कहा जाता था। सभा और समिति को प्रजापति की दुहिता यानि बेटियों जैसा माना जाता था। ब्रह्मा को प्रजापति भी कहा जाता है इस कारण भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई। ब्रह्मा की बेटी सरस्वती श्वेत रंग की थीं, लाल रंग की नहीं।

पुराणों में हेरफेर?

मध्य और अंग्रेज काल में पुराणों के साथ बहुत छेड़छाड़ की गई है। हिन्दू धर्म के दो ग्रंथों ‘सरस्वती पुराण’ और ‘मत्स्य पुराण’ में सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा का सरस्वती से विवाह करने का प्रसंग है जिसके फलस्वरूप इस धरती के प्रथम मानव ‘मनु’ का जन्म हुआ। लेकिन पुराणों की व्याख्या करने वाले सरस्वती के जन्म की कथा को उस सरस्वती से जोड़ देते हैं जो ब्रह्मा की पत्नी हैं जिसके चलते सब कुछ गड्ड मड्ड हो चला है। हालांकि इस पर शोध कर इस भ्रम को स्पष्ट किए जाने की आज ज्यादा जरूरत है.

आर्यावर्त में सरस्वती ज्ञान की धारा को कहा जाता रहा है। वेदों की रचना भी सरस्वती नदी के किनारे हुई। उसके रचनाकार सारस्वत ब्राह्मण कहलाये।

इस दिशा में सही बात को जानने की इच्छा होगी तो पता चलना इतना कठिन नहीं. पर authentic source को जानना पढ़ना पड़ता है। शेष तो जो एजेण्डा सेटर हैं उनका तो काम ही है ऐसे विभ्रम पैदा करने के लिए प्रयत्न करना। विषय और संस्कृति को समझने के लिए भाषा ज्ञान सर्वथा आवश्यक है। अनुवाद ने दोबारा जितना सत्यानाश किया है उतना भारतीय विश्वविद्यालयों के विशालतम पुस्तकालय जलाने से ही सम्भव हो सका था. ज्ञान परंपरा तब भी नहीं खत्म कर सके। और आज के लोग कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा उठा कर कुछ भी थोथा लिखते हैं। शेष जिन्होंने कभी वैदिक साहित्य पढ़ा नहीं उसे बड़ी उत्सुकता से प्रसारित करने को तत्पर रहते हैं।
हिन्दू दर्शनशास्त्र की परम सत्य की आध्यात्मिक संकल्पना ब्रह्मन् से अलग हैं।] ब्रह्मन् लिंगहीन हैं परन्तु ब्रह्मा पुलिंग हैं। प्राचीन ग्रंथों में इनका सम्मान किया जाता है। भारत और थाईलैण्ड में इन पर समर्पित मंदिर हैं। राजस्थान के पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर और बैंकॉक का इरावन मंदिर (अंग्रेज़ी: Erawan Shrine) इसके उदाहरण हैं।

प्रजापति दो हैं, एक ब्रह्मा और एक राजा।