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सिर्फ भारत में ही नहीं मां दुर्गा के मंदिर विदेशों में भी मौजूद हैं आइए जानें मां के ऐसे मंदिरों के बारे मे

हमारे देश में देवी दुर्गा के कई प्रसिद्ध शक्तिपीठ और मंदिर उपस्थित है। हर शक्तिपीठ की अलग-अलग मान्यताएं है। माना जाता है कि देवी सती ने अपने प्राण त्याग दिए तब भगवान शिव उन्हे कंधे में लेकर तांडव करने लगे। उस समय उन्हें रोकने के लिए विष्णु ने चक्र चलाकर देवी के शरीर को कई भाग में बांटा और ऐसा करने पर उनके अंग और आभूषण जिन स्थानों में गिरे वे शक्तिपीठ कहलाये।
शक्तिपीठ सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि भारत से बाहर विदेशों में भी मौजूद है। आइए जानते हैं उन शक्तिपीठों के बारे में के बारे मेंः

हिंगलाज शक्तिपीठ पाकिस्तानः

देवि का यह शक्तिपीठ पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित है। इन्हें हिंगलाज माता के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि देवी का सिर सिर इसी स्थान पर गिरा था। इसलिए इसे बहुत ही चमत्कारी और दिव्य माना जाता है। पाकिस्तान के लोग भी इस देवी को मानते हैं। इन्हें नानी का मंदिर के नाम से जानते हैं और यहां हर साल नानी का हज भी मनाया जाता है।

उग्रतारा शक्तिपीठ बांग्लादेश:

देश से बाहर बांग्लादेश में शिकारपुर नामक स्थान पर उग्र तारा शक्तिपीठ शक्तिपीठ तारा शक्तिपीठ है। जो सुनंदा नदी के तट पर स्थित है। यहां देवी का नाक गिरा था। इसे विशेष शक्तिशाली माना जाता है। बांग्लादेश पर इसके अलावा और अन्य तीन शक्तिपीठ शक्तिपीठ भी हैं हैं शक्तिपीठ भी हैं अन्य तीन शक्तिपीठ शक्तिपीठ भी हैं हैं अलावा और अन्य तीन शक्तिपीठ शक्तिपीठ भी हैं हैं शक्तिपीठ भी हैं अन्य तीन शक्तिपीठ शक्तिपीठ भी हैं हैं।
बांग्लादेश में अपर्णा शक्तिपीठ भवानीपुर गांव में है। यहां माता सती के पैर की पायल गिरी थी। तीसरा शक्तिपीठ चट गांव में स्थित है। यहां मां की दाई भूजा गिरी थी। जबकि बाई हथेली बांग्लादेश के यशोर नामक शहर पर गिरी थी थी। इस तरह से बांग्लादेश में कुल 4 शक्तिपीठ मौजूद है मौजूद है।

नेपाल के शक्ति पीठः

भारत के पड़ोसी देश नेपाल में भी माता के कई शक्तिपीठ हैं। नेपाल में गंडक नदी के किनारे आदि शक्ति का शक्ति पीठ स्थित है। यहां माता सती का दाया गाल गिरा था। वही नेपाल के प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर में गुहेश्वरी मंदिर पास में ही स्थित है। जहां देवी सती के दोनों घुटने गिरे थे। इसके साथ ही नेपाल के जनकपुर में वन दुर्गा, जय मंगल और उग्रतारा मंदिर भी स्थित है।

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श्रीलंका में शक्ति पीठः

श्रीलंका में भी देवी सती के पैरों की पायल गिरी थी। इसलिए यहां भी एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ बना। जहां माता इंद्राणी की पूजा की जाती है।

तिब्बत शक्तिपीठः

तिब्बत में मानसरोवर नदी के किनारे मानस शक्तिपीठ स्थित है। जहां देवी सती की दाईं हथेली गिरी थी।
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